नई दिल्ली: धार की भोजशाला में हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिलने के बाद अब दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर (Qutub Minar Puja Demand Rises) को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है। क़ुतुब मीनार में पूजा की मांग को लेकर हिंदू संगठनों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के बैनर तले एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन से मुलाकात करने जा रहा है, जो भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर चुके हैं।
संगठनों का कहना है कि जब भोजशाला में हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिल सकता है, तो कुतुब मीनार परिसर में मौजूद हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के बीच पूजा की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती।
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27 मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने का दावा (Qutub Minar Puja Demand Rises)
क़ुतुब मीनार में पूजा की मांग के बीच फिर से यह दावा चर्चा में है कि कुतुब मीनार परिसर में मौजूद कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण 27 हिंदू और जैन मंदिरों को तोड़कर किया गया था। मस्जिद के प्रवेश द्वार पर मौजूद शिलालेख का हवाला देते हुए हिंदू संगठन इसे ऐतिहासिक प्रमाण बता रहे हैं। संगठनों का दावा है कि परिसर में आज भी कई जगह हिंदू देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां दिखाई देती हैं। कहीं भगवान विष्णु की प्रतिमा है, तो कहीं माता पार्वती की गोद में गणेश जी की मूर्ति मौजूद है। कई मूर्तियां (Qutub Minar Puja Demand Rises) दीवारों में लगी हुई हैं और कुछ खुले स्थानों पर रखी हुई हैं।
पर्यटकों की भावनाएं होती हैं आहत
हिंदू संगठनों का कहना है कि परिसर में मौजूद मूर्तियों की हालत देखकर कई पर्यटक भावुक हो जाते हैं। उनका आरोप है कि कुछ मूर्तियों को अनादर की स्थिति में लगाया गया है। विशेष रूप से गणेश जी की एक खंडित मूर्ति (Qutub Minar Puja Demand Rises) को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसे दीवार के निचले हिस्से में लगाया गया है। हालांकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने उसे कांच से ढक दिया है, लेकिन लंबे समय से उसकी सफाई नहीं होने का भी दावा किया जा रहा है।
लौह स्तंभ को बताया जा रहा विष्णु मंदिर का हिस्सा
क़ुतुब मीनार परिसर में मौजूद लौह स्तंभ भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि यह स्तंभ मूल रूप से राजा अनंगपाल द्वारा बनवाए गए विष्णु मंदिर में स्थापित था। इतिहासकारों और कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्तंभ (Qutub Minar Puja Demand Rises) पर मौजूद शिलालेख चौथी शताब्दी के बताए जाते हैं। ऐसा भी माना जाता है कि स्तंभ के शीर्ष पर कभी भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की प्रतिमा लगी हुई थी।
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“देश की दूसरी भोजशाला” बताया जा रहा ढांचा
ASI के पूर्व निदेशक डॉ. धर्मवीर शर्मा का कहना है कि कुतुब मीनार परिसर का विवादित ढांचा मंदिर वास्तुकला के कई प्रमाण प्रस्तुत करता है। उनके अनुसार स्तंभों, दीवारों और निर्माण शैली में हिंदू एवं जैन मंदिरों के अवशेष साफ दिखाई देते हैं। उन्होंने दावा किया कि बाद में ऊपरी हिस्से को मस्जिद (Qutub Minar Puja Demand Rises) का स्वरूप दिया गया। इसी वजह से कई लोग इस परिसर को “देश की दूसरी भोजशाला” भी कह रहे हैं।
साकेत कोर्ट में मामला अभी लंबित
क़ुतुब मीनार में पूजा की मांग को लेकर मामला फिलहाल अदालत में लंबित है। वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि पूजा की अनुमति को लेकर साकेत कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हालांकि पहले कोर्ट ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी थी। बाद में दोबारा याचिका दाखिल की गई, जिस पर नोटिस जारी हो चुके हैं और मामला अभी विचाराधीन है।
हिंदू संगठनों ने उठाया बड़ा सवाल
यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अध्यक्ष जय भगवन गोयल का कहना है कि परिसर में मौजूद देवी-देवताओं की मूर्तियां (Qutub Minar Puja Demand Rises) और सनातन संस्कृति के प्रतीक इस स्थान के इतिहास की गवाही देते हैं। उनका कहना है कि अगर भोजशाला में पूजा की अनुमति दी जा सकती है, तो कुतुब मीनार परिसर में भी हिंदुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए।
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