दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जीएसटी दर घटने पर कीमत में कमी न करना ‘धोखाधड़ी के समान’Delhi High Court decision
नई दिल्ली: Delhi High Court decision दिल्ली हाई कोर्ट ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कमी का लाभ उपभोक्ताओं तक न पहुँचाने के संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी दरें कम होने पर उपभोक्ताओं को उत्पादों की कीमतों में सीधी और प्रत्यक्ष गिरावट दिखनी चाहिए। पीठ ने चेतावनी दी कि कीमतों में कमी किए बिना उत्पादों में सूक्ष्म बदलाव करना या मात्र मात्रा बढ़ा देना, टैक्स कटौती का वास्तविक लाभ नहीं देता और यह धोखाधड़ी के समान है।
प्रत्यक्ष लाभ आवश्यक, ठगी अस्वीकार्यDelhi High Court decision
Delhi High Court decision :न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने मेसर्स शर्मा ट्रेडिंग कंपनी की याचिका पर यह अहम फैसला सुनाया। पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि कीमतों में बदलाव किए बिना केवल मात्रा बढ़ाने या प्रमोशनल स्कीम चलाने से टैक्स कटौती का वास्तविक लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिलता। न्यायालय का यह रुख मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर देता है।
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Delhi High Court decision :पीठ ने स्पष्ट किया कि जीएसटी दरों को कम करने का मुख्य उद्देश्य वस्तुओं और सेवाओं को खरीदारों के लिए अधिक किफायती बनाना है। ऐसी कोई भी प्रथा जो इस कटौती के उद्देश्य को विफल करती है, उसे अनुमति नहीं दी जा सकती।
पुराना मामला, व्यापक संदेशDelhi High Court decision
Delhi High Court decision :हाई कोर्ट का यह फैसला मेसर्स हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के वितरक मेसर्स शर्मा ट्रेडिंग कंपनी द्वारा दायर एक याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय मुनाफाखोरी निरोधक प्राधिकरण (NAPA) के सितंबर 2018 के आदेश को चुनौती दी थी। NAPA ने फर्म को जीएसटी दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक न पहुँचाने के कारण मुनाफाखोरी का दोषी ठहराया था।
Delhi High Court decision :प्राधिकरण ने फर्म को मुनाफाखोरी के लिए 18 प्रतिशत ब्याज सहित 5,50,186 रुपये उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा करने का निर्देश दिया था। यह मामला वर्ष 2017 का है, जब कर घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था, लेकिन फर्म ने वैसलीन की बिक्री पर 28 प्रतिशत जीएसटी वसूलना जारी रखा। साथ ही, उपभोक्ताओं को लाभ देने के बजाय फर्म ने बेस मूल्य बढ़ा दिया था।
Delhi High Court decision :पीठ ने कंपनी की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि जीएसटी में कमी का तर्क यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता को उक्त कमी का लाभ मिले। मूल्य में कमी न करने को इस आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता कि मात्रा बढ़ा दी गई है या कोई ऐसी योजना लागू की गई है जो मूल्य वृद्धि को उचित ठहराती हो। यह फैसला हाल ही में 22 सितंबर 2025 से प्रभावी नए कर ढांचे में हुए बड़े बदलावों के मद्देनजर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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