नई दिल्ली: gift fire दिल्ली की एक अदालत ने उपहार अग्निकांड के दोषी सुशील अंसल के खिलाफ आपराधिक मामलों को कथित तौर पर छिपाने और पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए झूठी घोषणाएं प्रस्तुत करने के एक मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया है।
अंसल के खिलाफ 2019 में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने मामला दर्ज gift fire
अंसल के खिलाफ 2019 में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया था और उस पर झूठी जानकारी देने का आरोप लगाया गया था क्योंकि उसने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपनी दोषसिद्धि की घोषणा नहीं की थी।
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पटियाला हाउस अदालत की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेया अग्रवाल ने 28 नवंबर के आदेश gift fire

पटियाला हाउस अदालत की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रेया अग्रवाल ने 28 नवंबर के आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया अंसल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 177 (लोक सेवक को गलत जानकारी देना), धारा 181 (शपथ पर झूठा बयान देना) और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 (पासपोर्ट से संबंधित अपराध) के तहत अपराध के लिए मामला आगे बढ़ाने के वास्ते पर्याप्त सामग्री है।
उन्होंने मामले को 13 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से आरोप तय gift fire
उन्होंने मामले को 13 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से आरोप तय करने के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत ने कहा कि अंसल ने 2013 के तत्काल पासपोर्ट आवेदन के साथ प्रस्तुत शपथपत्र में ‘‘जानबूझकर अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों का विवरण तथा दोषसिद्धि के आदेश को छुपाया है।’’
लिखित शिकायत के अभाव में अभियोजन पक्ष को मामला दर्ज करने से रोक दिया gift fire
बचाव पक्ष के इस दावे को खारिज करते हुए कि लिखित शिकायत के अभाव में अभियोजन पक्ष को मामला दर्ज करने से रोक दिया गया था, अदालत ने कहा कि यह शर्त पूरी हो गई है क्योंकि मामला दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार शुरू किया गया था।
अंसल का तीसरा आपराधिक मामला gift fire
आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उपहार त्रासदी पीड़ित संघ (एवीयूटी) की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह ‘‘कोई एकमात्र घटना नहीं है’’ बल्कि यह अंसल का तीसरा आपराधिक मामला है। उन्होंने कहा कि अंसल को उपहार अग्निकांड में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है, जिसमें 59 लोगों की जान चली गई थी और उसे साक्ष्यों से छेड़छाड़ के मामले में भी दोषी ठहराया गया है, जो कि न्यायालयों और न्याय प्रणाली का अपमान है। उपहार सिनेमा मामला 13 जून 1997 को हिंदी फिल्म ‘‘बॉर्डर’’ के प्रदर्शन के दौरान थियेटर में लगी आग से संबंधित है, जिसमें 59 लोगों की जान चली गई थी। उच्चतम न्यायालय ने सितंबर 2015 में अंसल बंधुओं गोपाल और सुशील अंसल को लापरवाही के कारण हुई मौत का दोषी ठहराया था।
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