नवमी के दिन कन्या पूजन से कैसे होगी मनोकामना पूर्ण: Maha Navami 2026

Navratri Second day

Maha Navami 2026: माँ सिद्धिदात्री पूजा विधि, पूजा-पाठ को पूर्ण करने का एक अनुष्ठान है। सूर्योदय से पहले, ब्रह्म मुहूर्त में उठें और शरीर को शुद्ध करने के लिए स्नान करें। बैंगनी या मोरपंखी हरे रंग के साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल और देवी की मूर्ति को गंगाजल से साफ करें। यदि आपने पहले दिन से ही कलश स्थापित किया हुआ है, तो सबसे पहले उसकी पूजा करें, और उसके बाद भगवान गणेश की पूजा करें।

माँ को अर्पित करें: Maha Navami 2026

देवी की मूर्ति पर लाल या पीले फूलों की ताज़ी माला चढ़ाएँ; कमल के फूल उन्हें विशेष रूप से प्रिय हैं। कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएँ। देवी की दिव्य उपस्थिति का आह्वान करने के लिए घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।

माँ सिद्धिदात्री का भोग पारंपरिक रूप से तिल (Sesame Seeds) या उनसे बनी मिठाइयाँ होती हैं। कई भक्त पारंपरिक ‘महा नवमी प्रसाद’ भी चढ़ाते हैं, जिसमें हलवा, पूरी और काले चने शामिल होते हैं। उनके मंत्रों का जाप करते हुए यह भोग चढ़ाएँ और अंत में सिद्धिदात्री की आरती करें।

कन्या पूजन क्यों किया जाता है: Maha Navami 2026

माँ सिद्धिदात्री का महत्व पारंपरिक ‘कन्या पूजन’ (कुमारी पूजा) अनुष्ठान तक भी फैला हुआ है। जहाँ कुछ लोग यह पूजा अष्टमी के दिन करते हैं, वहीं कई लोग नवमी को छोटी कन्याओं की पूजा करने के लिए सबसे शुभ और शक्तिशाली दिन मानते हैं, क्योंकि उन्हें देवी का ही जीवित स्वरूप माना जाता है।

इस दिन, नौ कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है, उनके पैर धोए जाते हैं, और उन्हें हलवा, पूरी और चने का पवित्र भोग परोसा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन छोटी कन्याओं को प्रसन्न करना, साक्षात् नवदुर्गा को प्रसन्न करने के बराबर है। यह अनुष्ठान इस हिंदू दर्शन को उजागर करता है कि ईश्वर हर स्त्री स्वरूप में निवास करता है।

नवमी के दिन माँ सिद्धिदात्री पूजा विधि का पालन करने के बाद ‘पारण’ किया जाता है—यानी नौ दिनों के उपवास को विधिवत रूप से तोड़ा जाता है। यह कार्य आमतौर पर कन्या पूजन और हवन (पवित्र अग्नि अनुष्ठान) संपन्न होने के बाद किया जाता है।

नवमी कन्या पूजन विधि 2026: Maha Navami 2026

  • सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल पर मां सिद्धिदात्री या महागौरी की पूजा करें।
  • कन्याओं के आने पर उनके पैर धोएं और उन्हें ऊंचे/साफ आसन पर बिठाएं।
  • कन्याओं के माथे पर कुमकुम/रोली और अक्षत का तिलक लगाएं। उनके दाहिने हाथ में मौली (कलावा) बांधें।
  • कन्याओं को हलवा, पूरी, काले चने, खीर और फल का सात्विक भोग अपने हाथों से परोसें।
  • भोजन के बाद उन्हें सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा (रुपये), वस्त्र, चुनरी, या खिलौने भेंट करें।
  • अंत में कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और सम्मानपूर्वक विदा करें।
  • नवमी कन्या पूजन में ध्यान देने योग्य बातें: Maha Navami 2026
  • 9 कन्याओं के साथ एक बालक (भैरव रूप में) को भी खिलाना शुभ माना जाता है।
  • कन्या पूजन के लिए सुबह का समय सर्वश्रेष्ठ है (26 मार्च को सुबह 6:18 से 7:50 और फिर 10:55 से 1:59 बजे के बीच उत्तम मुहूर्त है)।

विशेष नियम: कन्याओं को जाते हुए न देखें, बल्कि एक लोटा जल उनके पीछे रखें।

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