नई दिल्ली: Nationwide general strike on 12 February केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, स्वतंत्र सेक्टोरल फेडरेशनों और एसोसिएशनों के संयुक्त मंच ने 9 फरवरी को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी आम हड़ताल और बड़े पैमाने पर लामबंदी का ऐलान किया। मंच ने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि यह हड़ताल सभी क्षेत्रों (सरकारी, सार्वजनिक, निजी, औद्योगिक, ग्रामीण और शहरी भारत) में की जाएगी। संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ने भी इस आंदोलन को समर्थन देते हुए विशेष रूप से मनरेगा की बहाली पर जोर दिया है।
सभी राज्यों में हड़ताल को लेकर व्यापक अभियान चलाए जा चुके Nationwide general strike on 12 February
संयुक्त मंच के अनुसार, लगभग सभी राज्यों में हड़ताल को लेकर व्यापक अभियान चलाए जा चुके हैं, हड़ताल नोटिस दिए जा चुके हैं और तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। संगठनों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने बिना परामर्श और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों की अनदेखी करते हुए चार श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिनका उद्देश्य सामूहिक सौदेबाजी को कमजोर करना, हड़ताल के अधिकार को सीमित करना और बड़ी संख्या में मजदूरों को श्रम कानूनों, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा के दायरे से बाहर करना है। उनका कहना है कि ये नीतियां बड़े कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।
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सरकार का भारत को कल्याणकारी राज्य बनाए रखने Nationwide general strike on 12 February
मंच ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार का भारत को कल्याणकारी राज्य बनाए रखने का कोई इरादा नहीं है। मनरेगा को कमजोर करने, महिलाओं और युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के अवसर न होने, बढ़ती बेरोजगारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सेवाओं के निजीकरण, किसानों के खिलाफ नीतियों, शिक्षा और स्वास्थ्य के व्यवसायीकरण तथा बजट में सामाजिक क्षेत्रों की उपेक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। संगठनों ने हालिया विदेशी व्यापार समझौतों को भी किसानों, पशुपालन क्षेत्र और एमएसएमई के लिए नुकसानदेह बताया।
संयुक्त मंच ने सरकार से चारों श्रम संहिताओं और नियमों को रद्द करने Nationwide general strike on 12 February

संयुक्त मंच ने सरकार से चारों श्रम संहिताओं और नियमों को रद्द करने, ड्राफ्ट सीड बिल और बिजली संशोधन बिल वापस लेने, मनरेगा बहाल करने, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई का फैसला वापस लेने, शिक्षा से जुड़े नए विधेयकों को रद्द करने और खाली सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र के पदों को भरने की मांग की। अंत में मंच ने सभी राजनीतिक दलों, विशेषकर युवाओं और छात्रों से, कामकाजी लोगों के बुनियादी अधिकारों और देश के लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष ढांचे की रक्षा के लिए 12 फरवरी की हड़ताल के समर्थन में आगे आने का आह्वान किया।
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