गुरु पर शंका करोगे तो गिर जाओगे और गुरु पर विश्वास रखोगे तो तिर जाओगे
जींद: Satguru Kanwar Saheb Maharaj आज इंसान का तन मन और रूह तीनों दीन दुनिया के दुखों से घिरे हुए हैं और इन दुखों के कारण ही समाज विकृत होता जा रहा है। समाज की दशा और दिशा सुधारने के लिए आवश्यक है कि इन तीनों दुखों से निजात पाई जाए। इसका एकमात्र उपाय सत्संग है। क्योंकि सत्संग से इंसान के शारीरिक मानसिक और आत्मिक तीनों कष्ट मिट जाते हैं। यह सत्संग वचन परमसंत सतगुरु कंवर साहेब जी महाराज ने जींद के भिवानी रोड पर स्थित राधास्वामी आश्रम में संगत की विशाल हाजरी के समक्ष फरमाए।
हुजूर कंवर साहेब जी महाराज ने कहा Satguru Kanwar Saheb Maharaj
हुजूर कंवर साहेब जी महाराज ने कहा कि बिना गुरु के किसी की गति नही हुई। नारद जी का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि नुगरे का कोई मान नहीं होता। विष्णु जी की उपेक्षा का कारण बिना गुरु के जीवन की समझ आने पर नारद जी ने एक मछुआरे को अपना गुरु बना लिया लेकिन नारद जी के मुख से लेकिन शब्द सुनते ही विष्णु भगवान क्रोधित हो गए और नारद को चौरासी लाख यौनि भोगने का श्राप दे दिया। नारद जी ने क्षमा मांगते हुए उनसे इसका उपाय पूछा। विष्णु जी बोले कि उपाय तो तेरा गुरु ही बता सकता है। नारद जी मछुआरे गुरु के पास गए और सारी बात बताई। मछुआरा मुस्कराया और बोला कि एक कागज पर चौरासी लाख यौनि लिख लो और फिर उस पर लेट लगाओ, तेरी चौरासी लाख यौनि कट जाएगी।
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नारद जी जब यह बात विष्णु जी को बताई Satguru Kanwar Saheb Maharaj
नारद जी जब यह बात विष्णु जी को बताई तो विष्णु जी बोले जिस गुरु पर आपने लेकिन लगा कर शंका जताई थी उसी गुरु ने एक क्षण में आपकी चौरासी कटवा दी। हुजूर महाराज जी ने कहा कि गुरु पर शंका करोगे तो गिर जाओगे और गुरु पर विश्वास रखोगे तो तिर जाओगे। गुरु महाराज जी ने फरमाया कि कभी सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाये हमारा मूलमंत्र होता था। इंसान इंसान के काम आता था। कोई लाखों में एक ही है जो सुखी है वरना कोई तन से दुखी है, कोई मन से तो कोई धन से। इनमें भी सबसे बड़ा दुख मन का है और ये दुख केवल संतों की संगत से ही मिट सकता है।
जीवन के सारे काम हर रोज करते हो तो उस प्रभु की भक्ति से क्या जी चुराना Satguru Kanwar Saheb Maharaj

उन्होंने कहा कि जब जीवन के सारे काम हर रोज करते हो तो उस प्रभु की भक्ति से क्या जी चुराना। जिसने आपको ये सुख भोगने के लिए इंसानी जीवन दिया। इंसानी शरीर में सकल सृष्टि का वास है। सारे के सारे पदार्थ हमारे अंतर में हैं लेकिन मिलता वही है जिसका ख्याल हम पुख्ता करेंगे। मन, वचन और कर्म से पवित्र बनो सत्य के रास्ते पर चलो ताकि आपको सत्य ही मिले और आप सत्य में ही समा जाओ।
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