Stop the killings in Myanmar: म्यामां में हत्याएं रोकने के लिए रोहिंग्या मुसलमानों ने संयुक्त राष्ट्र में मदद की गुहार लगाई

Singer Zubin Garg

Stop the killings in Myanmar: संयुक्त राष्ट्र की जातीय अल्पसंख्यक समूह की स्थिति पर पहली उच्च-स्तरीय बैठक में रोहिंग्या मुसलमानों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह म्यामां में हो रही सामूहिक हत्याओं को रोके और इस उत्पीड़ित समूह के लोगों को सामान्य जीवन जीने में मदद करे।

ऐतिहासिक अवसर Stop the killings in Myanmar

‘वूमेंस पीस नेटवर्क’-म्यामां की रोहिंग्या संस्थापक और कार्यकारी निदेशक वाई वाई नू ने महासभा हॉल में संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों के मंत्रियों और राजदूतों से कहा, ‘यह म्यामां के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है लेकिन इसमें बहुत देर हो चुकी है।’ उन्होंने कहा कि रोहिंग्या और म्यामां के अन्य अल्पसंख्यकों ने दशकों से विस्थापन, उत्पीड़न और हिंसा झेली है तथा उन्हें नरसंहार का शिकार माने जाने के बावजूद इसे रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं देखी गई है। वाई वाई नू ने कहा, ‘यह चक्र आज समाप्त होना चाहिए।’

बांग्लादेश से आए ‘बंगाली’ मानता Stop the killings in Myanmar

बौद्ध बहुल म्यामां लंबे समय से रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों को बांग्लादेश से आए ‘बंगाली’ मानता रहा है, भले ही उनके परिवार देश में पीढ़ियों से रह रहे हों। लगभग सभी को 1982 से नागरिकता से वंचित रखा गया है। अगस्त 2017 में रोहिंग्या विद्रोही समूह द्वारा म्यामां के सुरक्षा कर्मियों पर किए गए हमलों के बाद सेना ने एक क्रूर अभियान चलाया जिसके कारण कम से कम 740,000 रोहिंग्या भागकर बांग्लादेश चले गए। सेना पर सामूहिक बलात्कार, हत्याएं और गांवों को जलाने का आरोप है । इस अभियान के कारण संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जातीय सफाये और नरसंहार के आरोप लगाए।

अहिंसक विरोध प्रदर्शनों Stop the killings in Myanmar

फरवरी 2021 में सेना द्वारा आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को हटाने और अहिंसक विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से दबाने के बाद से म्यामां हिंसा की चपेट में है। इससे लोकतंत्र-समर्थक छापामारों और जातीय अल्पसंख्यक सशस्त्र बलों द्वारा सशस्त्र प्रतिरोध और देश भर में लड़ाई शुरू हो गई, जिसमें पश्चिमी रखाइन राज्य भी शामिल है जहां हजारों रोहिंग्या अभी भी रहते हैं। इनमें से कई तो शिविरों में हैं। अमेरिका ने 2022 में कहा था कि म्यामां की सेना के सदस्यों ने रोहिंग्या के खिलाफ मानवता को शर्मसार करने वाले अपराध और नरसंहार किए हैं।

लगभग 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थी Stop the killings in Myanmar

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी प्रमुख फिलिपो ग्रैंडी ने हाल ही में म्यामां का दौरा किया था। उन्होंने मंगलवार को उच्च-स्तरीय बैठक में बताया कि बांग्लादेश में अब लगभग 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थी हैं और 2024 में सेना और अराकान आर्मी के बीच रखाइन में लड़ाई फिर से छिड़ने के बाद अतिरिक्त 150,000 लोगों ने पड़ोसी देश में सुरक्षा की तलाश की है। ग्रैंडी ने कहा कि रखाइन जातीय अल्पसंख्यक का सुसज्जित सैन्य समूह ‘अराकान आर्मी’ अब लगभग पूरे रखाइन राज्य को नियंत्रित करता है और वहां रोहिंग्या की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ‘अराकान आर्मी’ स्वायत्तता चाहता है।

भेदभाव का सामना करना पड़ता Stop the killings in Myanmar

उन्होंने कहा कि उन्हें अब भी भेदभाव का सामना करना पड़ता है, उनके गांवों को जलाया जाता है, उन्हें काम नहीं दिया जाता है, स्वतंत्र रूप से घूमने पर प्रतिबंध है, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल प्रतिबंधित है और गिरफ्तारी का खतरा बना रहता है। ग्रैंडी ने कहा, ‘उन्हें जबरन श्रम और जबरन भर्ती का शिकार बनाया जाता है और उनका जीवन हर दिन नस्लवाद और भय से परिभाषित होता है।’ म्यामां के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जूली बिशप ने कहा कि राजनीतिक संकट के सुलझने का कोई संकेत नहीं है, न तो कोई सहमत युद्धविराम है, न शांति का रास्ता और न ही कोई राजनीतिक समाधान।

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