फरीदाबाद:Gold worth Rs 15 lakh found in Faridabad junkyard हरियाणा के फरीदाबाद के सेक्टर-3 भगत सिंह कालोनी में रहने वाले स्क्रैप डीलर हाजी अख्तर ने 15 लाख का सोना लौटाकर ईमानदारी की नई मिसाल कायम की है। सोने की ज्वेलरी चार महीने तक कबाड़ के बीच एक डिब्बे में पड़ी रही। जैसे ही उन्हें यह मिली, उन्होंने इसे सही-सलामत उसके मालिक को लौटा दिया। हाजी अख्तर की ईमानदारी चर्चा का विषय बन गई है।
जितेश मल्होत्रा ने कहा कि हाजी अख्तर की ईमानदारी तारीफ के काबिल Gold worth Rs 15 lakh found in Faridabad junkyard
बल्लभगढ़ एसीपी जितेश मल्होत्रा की मौजूदगी में हाजी अख्तर ने अशोक शर्मा और उनकी पत्नी को ज्वेलरी लौटा दी। जितेश मल्होत्रा ने कहा कि हाजी अख्तर की ईमानदारी तारीफ के काबिल है और लोगों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। हाजी अख्तर कहते हैं कि वह 50 साल पहले फरीदाबाद खाली हाथ आए थे। आज अपनी मेहनत और ईमानदारी से उनके पास सब कुछ है। यही बात उन्हें ईमानदार बनने की प्रेरणा देती है।
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जनवरी 2025 में सेक्टर 3 में रहने वाले एलआईसी एजेंट अशोक शर्मा ने बताया Gold worth Rs 15 lakh found in Faridabad junkyard
जनवरी 2025 में, सेक्टर 3 में रहने वाले एलआईसी एजेंट अशोक शर्मा ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ प्रयागराज में महाकुंभ मेले में जा रहे थे। घर खाली था, इसलिए चोरी के डर से उन्होंने एक अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने सारी सोने की ज्वेलरी एक पुराने डिब्बे में पैक की और उसे लगभग 100 ग्राम वजऩ के कबाड़ के बोरे में छिपा दिया। उन्हें यकीन था कि अगर चोर घर में आए, तो वे अलमारियों में देखेंगे और कबाड़ को नजरअंदाज कर देंगे। इसके बाद, वह कुंभ मेले के लिए निकल गए। वहां से लौटने के बाद वे ज्वेलरी भूल गए। ज्वेलरी कबाड़ में ही रह गई। दिवाली की सफाई के दौरान अशोक शर्मा ने घर की सफाई की और कबाड़ को हाजी अख्तर के पास बेचने के लिए ले गए। इस कबाड़ में सोने की ज्वेलरी से भरा एक बॉक्स था। हाजी अख्तर ने अपने घर के कबाड़ को भी अपने बाकी सामान के साथ रख लिया।
दिवाली पर जब वह लक्ष्मी पूजा कर रहे थे तो उन्हें ज्वेलरी की ज़रूरत पड़ी Gold worth Rs 15 lakh found in Faridabad junkyard

दिवाली पर जब वह लक्ष्मी पूजा कर रहे थे तो उन्हें ज्वेलरी की ज़रूरत पड़ी। तभी उन्हें पता चला कि ज्वेलरी कबाड़ में रखी है और बॉक्स कबाड़ के साथ बिक गया है। वह तुरंत हाजी अख्तर के पास गए और उन्हें सब कुछ बताया। हाजी अख्तर ने गोदाम में बहुत ढूंढा, लेकिन अशोक शर्मा का ज्वेलरी बॉक्स कहीं नहीं मिला। वह निराश होकर घर लौट आए और ज्वेलरी वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी। उनकी पत्नी इस बात से बहुत दुखी और परेशान थीं। दो दिन पहले, जब हाजी अख्तर जमा किए गए कबाड़ को ट्रक में लोड कर रहे थे, तो उन्हें एक बॉक्स के अंदर कुछ हिलने की आवाज़ आई। उन्होंने उसे खोला और उसमें सोने की ज्वेलरी मिली। तभी उन्हें अशोक शर्मा की याद आई, जो चार महीने पहले उनके पास अपनी ज्वेलरी ढूंढने आए थे। उस समय अशोक शर्मा ने हाजी अख्तर को अपना मोबाइल नंबर दिया था। हाजी अख्तर ने उस नंबर पर उन्हें कॉल किया और ज्वेलरी का डिब्बा मिलने की जानकारी दी। अशोक बहुत खुश हुए। उन्होंने ऐसी किस्मत की कभी उम्मीद नहीं की थी।
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