mata kushmanda puja Digital Samaj जींद। नवरात्र के चौथे दिन रविवार को मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना के लिए मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ी। शहर के प्रसिद्ध मंदिर जयंती देवी मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, सोमनाथ मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, रघुनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्त माथा टेकने के लिए पहुंचना शुरू हो गए। पूजा अर्चना के लिए मंदिरों में आए श्रद्धालुओं ने मंदिरों के बाहर सजी दुकानों से बच्चों के लिए खिलौने इत्यादि की खरीददारी भी की। जयंती देवी मंंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों में ऐसा माना गया है कि यदि मां का यह स्वरूप आविर्भूत नहीं होता तो संपूर्ण संसार अपने ही विषैले पदार्थों से स्वयं ही नष्टï हो जाता।
चारों ओर विनाश, अंधकार एवं अज्ञानता का बोलबाला Mata Kushmanda Puja

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mata kushmanda puja Digital Samaj पूरे जगत में चारों ओर विनाश, अंधकार एवं अज्ञानता का बोलबाला होता। मां कुष्मांडा ने ही संसार में पनपी पूरी विषैली ऊर्जा को स्वयं पीकर सृष्टिï की रक्षा की थी। ब्रह्मांड उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा पड़ा। कुष्मांडा देवी का वास सूर्य मंडल के भीतर लोक में है। सूर्य लोक में रहने की शक्ति व क्षमता केवल इन्हीं में है। उन्होंने कहा कि नवरात्र के नौ दिन मानव जीवन में विशेष महत्व रखते हैं। इन दिनों में जो भी श्रद्धालु सच्चे दिल से मां भगवती की अराधना करता है मां भगवती उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करती है। उधर, माता वैष्णवी धाम में आयोजित महानर्वाण यज्ञ के दौरान आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि जर्रे-जर्रे में है मां का वास, वही है सबकी सृजनहार, वही है सबकी पालनहार, वही है सबकी तारनहार। वही है सबके हृदय की धड़कन, वही ऊर्जा के रूप में पूरे शरीर में प्रवाहित हो रही है। जब वही सब कुछ कर रही है, तो फिर ईष्र्या किससे, नफरत किससे। अत: मां के विराट स्वरूप से प्यार करो, उसी को चाहो, उसी के बन जाओ।
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