Bhagwat Address Appreciated: ‘हमारी भूमि में गौरव की नई ऊंचाई हासिल करने की क्षमता’, पीएम मोदी ने भागवत के संबोधन की सराहना की

Navratri

Bhagwat Address Appreciated: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने गुरुवार को विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के संबोधन की सराहना की। Prime Minister Narendra Modi ने कहा कि मोहन भागवत का संबोधन प्रेरणादायक है, जिससे पूरे विश्व को फायदा होगा।

आरएसएस के समृद्ध योगदान Bhagwat Address Appreciated

Prime Minister Narendra Modi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “संघचालक डॉ. मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) का प्रेरणादायक संबोधन, जिसमें उन्होंने राष्ट्र निर्माण में आरएसएस के समृद्ध योगदान पर प्रकाश डाला व हमारी भूमि में गौरव की नई ऊंचाइयों को हासिल करने की अंतर्निहित क्षमता पर बल दिया, जिससे संपूर्ण विश्व को लाभ होगा।”

‘आदर्श’ बनाने का आग्रह Bhagwat Address Appreciated

इससे पहले, नागपुर के ऐतिहासिक रेशमबाग मैदान में शताब्दी समारोह में बोलते हुए, Mohan Bhagwat ने राष्ट्र के लिए संघ के दृष्टिकोण और लक्ष्यों को पेश किया व समाज से ऐसा ‘आदर्श’ बनाने का आग्रह किया जो साथी नागरिकों को भारत की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित कर सके।

दैनिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान Bhagwat Address Appreciated

Prime Minister Narendra Modi ने कहा कि भारत को एक महाशक्ति के रूप में उभरने के लिए, व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र, दोनों को मजबूत करना होगा। संघ शाखाओं की भूमिका की व्याख्या करते हुए Mohan Bhagwat ने कहा कि वे मूल्यों और अनुशासन को बढ़ावा देने वाले दैनिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय पहचान और गौरव का संचार करते हैं। Mohan Bhagwat ने कहा कि शताब्दी वर्ष में आरएसएस का लक्ष्य ‘व्यक्ति निर्माण’ के कार्य को पूरे देश में विस्तार देना है, जिसमें ‘पंच परिवर्तन’ पहल को स्वयंसेवकों के उदाहरणों के माध्यम से समाज के सभी वर्गों की ओर से अपनाया जाएगा।

पंच परिवर्तन’ के मूल्य सामाजिक समरसता Bhagwat Address Appreciated

Prime Minister Narendra Modi ने कहा कि ‘पंच परिवर्तन’ के मूल्य सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भरता व कानूनी, नागरिक और संवैधानिक कर्तव्यों के पालन पर केंद्रित हैं। Mohan Bhagwat ने पड़ोसी देशों में बढ़ती अस्थिरता पर भी चिंता व्यक्त की और व्यापक जन असंतोष के कारण श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुए शासन परिवर्तनों का हवाला दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाएं भारत के भीतर सतर्कता और आत्मनिरीक्षण की मांग करती हैं।

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