Buying US Crude Oil: भारत ने बढ़ा दी अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद, पर वजह डोनाल्ड ट्रंप का दबाव नहीं कुछ और

Buying US Crude Oil: भारत की तरफ से अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद में बड़ा इजाफा हुआ है। भारतीय रिफाइनरियों ने इस साल की पहली छमाही में बड़े पैमाने पर अमेरिकी कच्चा तेल खरीद है। यह आंकड़ा ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका की ओर से भारत पर 25 फीसदी का अतिरिक्त और कुल 50 पर्सेंट टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका की ओर से रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत पर यह टैरिफ लगाया गया है। वहीं यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय रिफाइनरियों ने अमेरिका से खरीद बढ़ाई है। यही नहीं रूसी तेल खरीद से भारत को होने वाली सालाना बचत के आंकड़े भी सामने आए हैं। भारत को साल भर में सिर्फ 2.5 अरब का ही फायदा होता है।

अमेरिकी तेल की खरीद की Buying US Crude Oil

पहले यह आंकड़ा 25 अरब तक बताया जा रहा था, लेकिन यह अनुमान गलत साबित हुए हैं। एक रिसर्च रिपोर्ट में यह आंकड़ा बताया गया है। इस सप्ताह भारत की सरकारी और निजी रिफाइनरी कंपनियों ने सामान्य से ज्यादा अमेरिकी तेल की खरीद की है। हालांकि जानकारों का कहना है कि इसकी वजह कोई अमेरिकी दबाव नहीं है बल्कि कम कीमत पर उपलब्धता है। फिलहाल अमेरिकी कच्चे तेल का दाम मिडल ईस्ट के कई देशों के मुकाबले कम है। ऐसे में भारत ने अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ा दी है। साफ है कि भारत की नीति राष्ट्र प्रथम के तहत ही है और जहां से भी कच्चे तेल थोड़ा रियायती दरों पर मिलता है, वहां से खरीद की जा रही है।

वृद्धि और भी तेज रही Buying US Crude Oil

विशेष रूप से अप्रैल-जून 2025 तिमाही में यह वृद्धि और भी तेज रही—इस दौरान अमेरिका से कच्चे तेल का आयात पिछले साल की तुलना में 114% बढ़ गया। जुलाई 2025 में तो जून के मुकाबले अमेरिकी क्रूड का आयात 23% अधिक रहा। इस महीने कुल मिलाकर भारत ने रोज़ाना लगभग 4.55 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल मंगाया, जिसमें रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना रहा, जबकि अमेरिका का हिस्सा जून की तुलना में बढ़कर कुल आयात का लगभग आठ प्रतिशत हो गया।

रूसी तेल खरीद बंद करने का दबाव Buying US Crude Oil

इसी बीच वाइट हाउस ट्रेड एडवाइज़र पीटर नवारो सहित कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने बार-बार नई दिल्ली पर रूसी तेल खरीद बंद करने का दबाव डाला है और आरोप लगाया कि इससे यूक्रेन युद्ध को फंडिंग मिलती है। इसके जवाब में नई दिल्ली ने इन आरोपों को ‘अनुचित’ बताते हुए अपने रुख का बचाव किया है। हालांकि आलोचना शुरू होने के बाद रूसी तेल खरीदी कुछ कम ज़रूर हुई लेकिन पूरी तरह बंद नहीं हुई।

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