Nithari Massacre: उच्चतम न्यायालय ने निठारी हत्याकांड से संबंधित एक मामले के दोषी सुरेंद्र कोली (Surendra Koli) की ओर से दायर क्यूरेटिव याचिका पर मंगलवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने खुली अदालत में संक्षिप्त सुनवाई के दौरान इस मामले को ‘एक मिनट में अनुमति देने वाला’ बताते हुए अहम टिप्पणियां कीं, जिससे Surendra Koli के जेल से बाहर आने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
उम्रकैद की सज़ा काट रहा Nithari Massacre
पीठ ने यह निर्णय उस वक्त सुरक्षित रखा जब शेष 12 मामलों में Surendra Koli पहले ही बरी हो चुका है और केवल एक ही मामले में वह उम्रकैद की सज़ा काट रहा है। यह असामान्य स्थिति न्यायपालिका के समक्ष विचारणीय प्रश्न खड़ी कर रही है।
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पीठ की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ Nithari Massacre
तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई के दौरान न्याय के उपहास को रोकने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने टिप्पणी की कि जब अन्य मामलों में Surendra Koli को बरी कर दिया गया है, तो केवल इस एक मामले में उसे दोषी ठहराया जाना “एक अजीब स्थिति पैदा कर देगा” और यह “न्याय का उपहास” हो सकता है।
एकमात्र दोषसिद्धि के आधार पर सवाल Nithari Massacre
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने भी इस एकमात्र दोषसिद्धि के आधार पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि Surendra Koli की दोषसिद्धि केवल एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी पर आधारित है। उन्होंने सवाल किया कि “क्या यह संभव है कि रसोई के चाकू से हड्डियां काटी जाएं?” ये टिप्पणियाँ दर्शाती हैं कि शीर्ष अदालत इस अंतिम मामले की दोषसिद्धि के साक्ष्यों पर गंभीर रूप से विचार कर रही है।
क्या है क्यूरेटिव याचिका? Nithari Massacre
Surendra Koli ने अपनी उम्रकैद की सज़ा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह क्यूरेटिव याचिका दाखिल की है। इससे पहले, इस मामले में उसकी पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी थी। यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय में किसी अंतिम न्यायिक निर्णय के विरुद्ध उपलब्ध अंतिम कानूनी उपाय होती है, जो न्याय के घोर विफल होने की स्थिति में दायर की जाती है।
निठारी कांड की पृष्ठभूमि Nithari Massacre
निठारी कांड की शुरुआत 7 मई 2006 को हुई थी, जब नोएडा के निठारी गांव में एक युवती की गुमशुदगी दर्ज हुई थी। 29 दिसंबर 2006 को यह मामला तब राष्ट्रीय सुर्खियां बना जब मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे के नाले से बच्चों और महिलाओं के 19 कंकाल बरामद किए गए। पुलिस ने पंढेर और उसके नौकर Surendra Koli को गिरफ्तार किया था।
अदालत ने फांसी की सज़ा दी Nithari Massacre
Surendra Koli पर बलात्कार और हत्या के कुल 13 मामले थे। अधिकांश मामलों में निचली अदालत ने उसे फांसी की सज़ा दी थी। हालांकि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2023 को Surendra Koli और पंढेर को 12 मामलों में बरी कर दिया था। इस वर्ष 30 जुलाई को, सुप्रीम कोर्ट ने भी उच्च न्यायालय के इस फैसले को बरकरार रखा था। वर्तमान में Surendra Koli केवल रिम्पा हलदर हत्या केस से जुड़े एक मामले में सज़ा काट रहा है। 2015 में, दया याचिका के निपटारे में हुई देरी के कारण उसकी फांसी की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के सकारात्मक रुख से उसके जेल से बाहर आने की संभावना बनती दिख रही है।
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