Roger Moore: जेम्स बॉन्ड के किरदार को नया आयाम दिया रोजर मूर ने

The Bads of Bollywood

Roger Moore: अभिनेता रोजर मूर (Roger Moore) की फिल्मों में शुरुआत आसान नहीं रही, कभी टूथपेस्ट के मॉडल बने, कभी विज्ञापनों में मुस्कुराते नज़र आए। लंबे इंतज़ार के बाद 1973 में फिल्म “लाइव एंड लेट डाय” ने उनकी किस्मत बदल दी। Roger Moore ने सीन कॉनरी के बाद जेम्स बॉन्ड (James Bond) का किरदार निभाया, और यह जिम्मेदारी आसान नहीं थी।

किरदार को पूरी तरह नया रूप दिया Roger Moore

लेकिन उन्होंने इस किरदार को पूरी तरह नया रूप दिया  हिंसा और गुस्से की जगह उन्होंने व्यंग्य और शालीन मुस्कान से दर्शकों को जीता। उनकी मशहूर लाइन “ माय नेम इज बॉन्ड… James Bond” तलवार की तरह नहीं, बल्कि रेशमी रूमाल की तरह लगती थी। 45 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली बार बॉन्ड की भूमिका निभाई और 58 वर्ष की उम्र में आखिरी बार।

मूर का भारत से भी गहरा रिश्ता Roger Moore

उम्र पर उठे सवालों पर उनका जवाब यादगार था “अगर बॉन्ड गोलियों से बच सकता है, तो उम्र से क्यों नहीं?” Roger Moore का भारत से भी गहरा रिश्ता रहा एक तो अपनी मां की वजह से, और दूसरा फिल्मों के कारण। 1983 में “ऑटोपुसी” की शूटिंग के लिए जब वे उदयपुर आए, तो भारत की भीड़, गर्मी और सुंदरता को पूरे दिल से अपनाया। शूटिंग के दौरान जब एक भारतीय स्टंट कलाकार नाव से गिरने लगा, तो मूर ने बिना झिझक उसे खींचकर बचा लिया। बाद में मुस्कुराते हुए बोले, “ ए बॉन्ड मस्ट सेव लाइव इवन विथआउट केमराज।”

रोजर मूर का निधन Roger Moore

भारत को उन्होंने “अव्यवस्था और आकर्षण का संगम” बताया और लिखा  “यू डोंट विजिट इंडिया, इंडिया विजिट यू फोरेवर” अपनी आत्मकथा “माय वर्ड इज माय बॉन्ड” में Roger Moore ने लिखा, “मैं हीरो नहीं था, बस एक सज्जन आदमी था जिसे कभी-कभी बंदूक थमाई जाती थी।” 23 मई 2017 को Roger Moore का निधन हो गया, लेकिन वे आज भी दर्शकों के दिलों में ज़िंदा हैं। उन्होंने गोलियों से नहीं, मुस्कान से जीत हासिल की  और यही मुस्कान उन्हें अमर बनाती है।

जेम्स बॉन्ड के किरदार को नया आयाम Roger Moore

मालूम हो कि 14 अक्टूबर 1927 को लंदन में जन्मे रोजर Roger Moore वो अभिनेता थे जिन्होंने James Bond के किरदार को नया आयाम दिया। उनके पिता जॉर्ज अल्फ्रेड मूर पेशे से दर्जी और बाद में पुलिसकर्मी बने, जबकि मां लिलियन का जन्म कलकत्ता में हुआ था। अनुशासित माहौल में पले Roger Moore ने शुरुआत में आर्ट स्कूल से चित्रकारी सीखी, लेकिन एक प्रोफेसर के सुझाव “तुम्हें पेंट नहीं, कैमरा संभालना चाहिए” ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी।

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