Use of the Veto: गाजा में युद्धविराम के प्रस्ताव पर अमेरिका ने फिर डाला अड़ंगा

Cyber Crime UP

Use of the Veto: गाजा में मानवीय सहायता और स्थायी युद्धविराम की मांग करने वाले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एक मसौदा प्रस्ताव पर अमेरिका ने वीटो कर दिया है। यह छठी बार है जब अमेरिका ने इजरायल और फिलिस्तीनी चरमपंथी हमास के बीच चल रहे संघर्ष पर सुरक्षा परिषद में अपने वीटो अधिकार का उपयोग किया है।

मसौदे के मुख्य बिंदु Use of the Veto

15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद के 10 निर्वाचित सदस्यों द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव में गाजा में तत्काल, बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम लागू करने का आह्वान किया गया था। इसके साथ ही, इजरायल से गाजा पट्टी में मानवीय सहायता की पहुँच पर लगाए गए सभी प्रतिबंधों को तुरंत हटाने की भी मांग की गई थी। प्रस्ताव में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की भी मांग शामिल थी। यह मसौदा गाजा में बिगड़ती मानवीय स्थिति और अकाल की आधिकारिक घोषणा के बाद अगस्त में प्रस्तुत किया गया था।

अमेरिका का विरोध और वैश्विक प्रतिक्रिया Use of the Veto

यह मतदान ऐसे समय में हुआ है जब इजरायली सेना गाजा शहर पर एक बड़े जमीनी हमले के लिए तैयार है, जिसके कारण हजारों फिलिस्तीनियों को दक्षिण की ओर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रस्ताव के पक्ष में 14 वोट पड़े, जो यह दर्शाता है कि अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय समुदाय गाजा में युद्धविराम चाहता है। अमेरिका ने पहले भी इजरायल के समर्थन में इस तरह के प्रस्तावों पर वीटो किया है। अमेरिका का तर्क है कि इस तरह के प्रस्ताव हमास को अपनी आतंकवादी गतिविधियों को जारी रखने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। यह वीटो अमेरिका की इजरायल के प्रति अपनी मजबूत नीति और उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

चीन-पाकिस्तान का प्रस्ताव Use of the Veto

इसी बीच, एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और उसकी आत्मघाती शाखा मजीद ब्रिगेड को आतंकवादी संगठन घोषित करने के लिए एक संयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। यह प्रस्ताव परिषद की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति के तहत है। पाकिस्तान के राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थित आतंकवादी संगठन सीमा पार हमलों को अंजाम दे रहे हैं, और इन संगठनों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है। यह प्रस्ताव क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण कदम है।

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