शिमला। Thundal Gatha song launch by Rohit Thakur शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शुक्रवार को यहां चिराग ज्योति माज्टा द्वारा रचित और स्वरबद्ध किए गए एलबम गीत ‘थुन्दल गाथा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह गीत क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति, ऐतिहासिक महत्ता और सुंदरता को प्रस्तुत करता है। गीत जिला शिमला के चौपाल विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्राचीन ग्राम थुन्दल की लगभग सात सौ वर्ष पुरानी लोकगाथा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस तरह की रचनात्मक पहलें हमारी समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पूर्वजों का संबंध भी थुन्दल गांव से रहा Rohit Thakur
रोहित ठाकुर ने कहा कि उनके पूर्वजों का संबंध भी थुन्दल गांव से रहा है और इस गीत के माध्यम से गांव से जुड़ी वीरता और पलायन की ऐतिहासिक गाथा को जीवंत करने का सराहनीय प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यह गीत क्षेत्र की प्राचीन जीवनशैली, रीति-रिवाजों और परंपराओं की झलक प्रस्तुत करता है तथा स्थानीय लोक कथाओं और मौखिक इतिहास की गहराई को दर्शाता है।
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रोहित ठाकुर ने चिराग ज्योति माज्टा को स्वर्गीय मीना राम संघाईक की गाथाओं को पारंपरिक शैली में स्वर देने के लिए बधाई दी और पूरी टीम को इस गीत को समर्पण और मौलिकता के साथ संगीतबद्ध करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि ‘थुन्दल गाथा’ एक वीरतापूर्ण लोककथा को सजीव रूप में प्रस्तुत करती है। यह कथा थुन्दल गांव के मुखिया बिदन की है, जिनका तत्कालीन राजा से लगान न देने को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद ने धीरे-धीरे भयंकर युद्ध का रूप ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप राजा की सेना द्वारा गांव में आगजनी की गई, इसके उपरान्त थुन्दल के निवासियों को पलायन कर जुब्बल क्षेत्र के बरथाटा, सिरमौर के कठवार और अन्य क्षेत्रों में बसना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि यह गीत क्षेत्र की मौलिक और पारंपरिक संगीत शैली में गाया गया है और यह लोगों के संघर्ष, आत्म-सम्मान तथा सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। यह हिमाचल की लोक परंपराओं की गौरवशाली धरोहर को जीवित रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है। इस अवसर पर संगीत निर्देशक सुरेंद्र नेगी, प्रमोटर गौरव गांगटा और स्थानीय निवासी डॉ. गोपाल संघाईक भी उपस्थित रहे।
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