Changing attitudes People with Disabilities: संयुक्त राष्ट्र के एक वैश्विक प्रतिनिधि ने दिव्यांग लोगों को सशक्त बनाने के लिए सोच बदलने की जरूरत पर जोर दिया।
जाइल्स ड्यूली ने कहा Changing attitudes People with Disabilities
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बुधवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाइल्स ड्यूली ने कहा कि तीन साल तक दिव्यांग व्यक्तियों के यूएन ग्लोबल एडवोकेट के तौर पर उनके अधिकारों की वकालत करने के बाद भी उन्हें लगता है कि वे उनकी आवाज दुनिया तक नहीं पहुंचा पाए। यह उनके कार्यकाल का अंतिम दिन था।
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इंटरनेशनल डे ऑफ़ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज Changing attitudes People with Disabilities
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल डे ऑफ़ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज पर उन्होंने कहा कि दिव्यांग लोगों के प्रति सोच की वजह से सिस्टम फेल हो रहा है। दिव्यांगों को आज भी बोझ की तरह देखा जाता है, जो एक बड़ी समस्या है। डूली, जिन्होंने अफगानिस्तान में तीन अंग खो दिए थे, बोले कि दिव्यांगता को “प्रेरणा की कहानी” बनाकर पेश करना गलत है।
तीन हाथ-पैर खोने वाले ड्यूली ने कहा Changing attitudes People with Disabilities
अफगानिस्तान में अपने तीन हाथ-पैर खोने वाले ड्यूली ने कहा, “जब भी मुझे संयुक्त राष्ट्र या किसी संस्था में बोलने बुलाया जाता है, लोग कहते हैं कि एक प्रेरक भाषण दीजिए। लेकिन मेरा काम लोगों को प्रेरित करना नहीं है। मेरा काम सच्चाई बताना है और सच्चाई यह है कि दिव्यांग लोगों के हालात जमीन पर आज भी नहीं बदले। मुश्किलों में हमेशा वही लोग पीछे छूट जाते हैं जो पहले से समाज में हाशिये पर हैं।”
खिलाड़ी या पर्वतारोहियों की प्रेरक कहानियाँ Changing attitudes People with Disabilities
उन्होंने कहा कि खिलाड़ी या पर्वतारोहियों की प्रेरक कहानियाँ अच्छी लगती हैं, पर वे ज्यादा लोगों की हकीकत नहीं हैं। वास्तविकता यह है कि ऐसे लोग तभी आगे बढ़ पाते हैं जब उनके सामने की रुकावटें हटाई जाती हैं। डूली ने कहा कि हमें दिव्यांगों को न तो दया का पात्र समझना चाहिए और न ही उन्हें प्रेरणा के तौर पर भी देखना चाहिए।
समाज ने रास्ते में बाधाएं खड़ी की Changing attitudes People with Disabilities
उन्होंने कहा, “हमें सिर्फ यह समझना है कि समाज ने ही उनके रास्ते में बाधाएं खड़ी की हैं। हमारा काम है इन बाधाओं को हटाना और उन्हें खुद को सशक्त करने का मौका देना।” इंटरनेशनल डे के लिए एक मैसेज में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने संदेश दिया कि दिव्यांग व्यक्तियों को समाज में पूरी तरह शामिल करना बहुत ज़रूरी है।
दिव्यांग लोग समाज में बदलाव ला रहे हैं Changing attitudes People with Disabilities
उन्होंने कहा, “दिव्यांग लोग समाज में बदलाव ला रहे हैं, इनोवेशन को लीड कर रहे हैं, नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। परंतु ज्यादातर समय उन्हें फैसले लेने की जगह पर शामिल ही नहीं किया जाता। दिव्यांग व्यक्तियों को शामिल किए बिना स्थायी विकास संभव नहीं।” गुटेरेस ने बताया कि आज भी भेदभाव, गरीबी और असुलभ सेवाएं जैसी कई रुकावटें दुनिया के एक अरब से ज्यादा दिव्यांग लोगों की भागीदारी रोकती हैं।
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