Navratri हम नौ महीने माँ के गर्भ में रहते हैं। गर्भ के भीतर केवल अंधकार होता है – रात ही रात। नौ महीने बाद जब हम जन्म लेते हैं, तो हमारे सामने एक नई सृष्टि दिखाई देती है। ठीक उसी प्रकार नवरात्रि के ये नौ दिन माँ के स्मरण और अपनी आत्मा से गहराई में जुड़ने के लिए हैं। नवरात्रि हमें तीनों प्रकार के तापों से मुक्त करती है – आधिभौतिक, आध्यात्मिक और अधिदैविक।
मां अपने बच्चों का हमेशा ख्याल रखती है Navratri
Navratri इसी अवसर पर मां जगजननी का आशीर्वाद लेने के लिए आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था कैथल में कल शाम 5:00 बजे दुर्गा होमां का आयोजन किया गया इस अवसर पर स्वामी ज्ञानेश्वर जी ने मां भगवती के बारे में बताया और बताया कि किस तरह से मां अपने बच्चों का हमेशा ख्याल रखती है।
मां की जय जयकारों से सारा पंडाल गूंज उठा Navratri
Navratri इस हवन के लिए विशेष रूप से पंडित जैन बेंगलुरु आश्रम से आए हुए थे और उन्होंने विधि पूर्वक मां जगदंबे की आराधना की और सबने इस यज्ञ में आहुति डाली ।इसके बाद मां की जय जयकारों से सारा पंडाल गूंज उठा ।विशेष रूप से दीपक सेठ जी द्वारा “चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है “भजन गया। इस मौके पर दीपक सेठ, डॉ भटनागर, सीमा भटनागर ,अल्पना मित्तल ,रुचि शर्मा, खुराना गरिमा गुगनानी सुनील सिकरी शरद गुप्ता ,भारती गुप्ता व अन्य लोग उपस्थित रहे।
Navratri का सच्चा संदेश

नवरात्रि केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और साधना का अवसर है। इन दिनों में यदि हम अपनी चेतना को भक्ति और ध्यान में लगाएँ, तो भीतर के असुर—राग-द्वेष, जड़ता और नकारात्मक संस्कार—सब मिट जाते हैं। जब चेतना प्रेम और भक्ति में रच-बस जाती है, तब केवल अनुराग ही शेष रह जाता है। यही नवरात्रि का वास्तविक संदेश है।
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