UN appeals on protests in Nepal: नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ भड़के हिंसक प्रदर्शनों और बढ़ती जनहानि को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता जाहिर की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मंगलवार को जारी बयान में नेपाल सरकार और प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से आपसी बातचीत कर विवादों का समाधान निकालें। गुटेरेस ने अधिकारियों से बल प्रयोग में संयम बरतने तथा नागरिकों के शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को सुरक्षित रखने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र की गहरी चिंता UN appeals on protests in Nepal
महासचिव गुटेरेस ने कहा कि नेपाल में जारी हालात पर संयुक्त राष्ट्र लगातार नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, “यह आवश्यक है कि सरकार और सुरक्षा बल अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करें और बल प्रयोग केवल अनिवार्य परिस्थितियों में ही किया जाए। हम नेपाल में हुई जनहानि से बेहद दुःखी हैं।”
लोकतंत्र पर बल
गुटेरेस ने नेपाल की लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में एक जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था है, और ऐसे माहौल में असहमति का समाधान केवल शांतिपूर्ण संवाद और बातचीत के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रदर्शनकारियों को आमने-सामने बैठकर चर्चा करनी चाहिए और हिंसा से बचते हुए आगे का रास्ता निकालना चाहिए।
नेपाल में हिंसक प्रदर्शन और कर्फ्यू UN appeals on protests in Nepal
नेपाल में सोमवार से सोशल मीडिया बैन को लेकर विशेष रूप से युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर पुलिस और सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। स्थिति को काबू में लाने के लिए नेपाल सरकार ने काठमांडू सहित कई प्रमुख शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया है। वहीं सड़कों पर सुरक्षा बलों की सख्त तैनाती की गई है और इंटरनेट सेवाएं कई इलाकों में बाधित की गई हैं।
भारत की एडवाइजरी
नेपाल में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने नेपाल में रहने और यात्रा कर रहे नागरिकों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा है।
स्थिति संवेदनशील, जरूरत संवाद की UN appeals on protests in Nepal
विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल जैसे संवेदनशील भौगोलिक और राजनीतिक हालात वाले देश में स्थिरता कायम रखने के लिए व्यापक स्तर पर आपसी संवाद ही समाधान का रास्ता हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र का यह बयान नेपाल सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आपसी संवाद की दिशा में अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा है।
