Pithampur Gas Tragedy Waste 2026: पीथमपुर में गैस त्रासदी के रासायनिक कचरे को हटाने की मांग को लेकर मौन प्रदर्शन

Pithampur Gas Tragedy Waste

Pithampur Gas Tragedy Waste ‘पीथमपुर बचाओ समिति’ के सदस्यों ने आसाराम चौराहे पर मौन विरोध प्रदर्शन

धार: Pithampur Gas Tragedy Waste मध्‍य प्रदेश के धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में शुक्रवार ‘पीथमपुर बचाओ समिति’ के सदस्यों ने आसाराम चौराहे पर मौन विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी भोपाल गैस त्रासदी के रासायनिक कचरे से निकली 899 टन राख को शहर से हटाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान कई सदस्य मुंह पर काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे थे। 

Pithampur Gas Tragedy Waste भोपाल गैस त्रासदी का 337 टन रासायनिक कचरा निष्पादन के लिए पीथमपुर लाया गया

उनका कहना है कि एक साल पहले भोपाल गैस त्रासदी का 337 टन रासायनिक कचरा निष्पादन के लिए पीथमपुर लाया गया था। इसे पीथमपुर स्थित रामकी एनवायरो नामक कंपनी में तीन ट्रायल के बाद जलाया गया था। समिति के अनुसार, कचरा निष्पादन के बाद बची 899 टन राख अब भी रामकी कंपनी में रखी है, जो शहर के नागरिकों के लिए खतरनाक है। 

Pithampur Gas Tragedy Waste समिति के अध्यक्ष हेमंत हीराले ने बताया कि माननीय न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को इस राख

समिति के अध्यक्ष हेमंत हीराले ने बताया कि माननीय न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को इस राख को किसी अन्य स्थान पर दफनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने अब तक न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी की है। अध्यक्ष श्री हीराले ने आगे कहा कि इस राख में कई जहरीले रसायन तत्व अब भी मौजूद हैं, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बरकरार है। समिति ने सरकार से मांग की है कि इस राख को जल्द से जल्द पीथमपुर से अन्यत्र भेजा जाए। समिति इस विषय को लेकर जल्द ही माननीय उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका भी दायर करेगी।

प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े कचरे के निष्पादन के बाद बची हुई लगभग 899 टन जहरीली राख को शहर से हटाने की मांग था। उनका कहना है कि यह राख अभी भी रामकी एनवायरो कंपनी परिसर में सुरक्षित तरीके से निस्तारण के बिना रखी हुई है, जिससे आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है।

Pithampur Gas Tragedy Waste 337 टन कचरे के निष्पादन के बाद बची राख पर विवाद

समिति के अनुसार, एक साल पहले भोपाल गैस त्रासदी से संबंधित लगभग 337 टन रासायनिक कचरा Pithampur स्थित रामकी एनवायरो कंपनी में लाया गया था। इस कचरे को कई ट्रायल के बाद जलाकर नष्ट किया गया, लेकिन इसके बाद बची हुई भारी मात्रा में राख अभी भी वहीं पड़ी है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह राख सामान्य कचरा नहीं बल्कि जहरीले रसायनों से युक्त है, जो लंबे समय तक पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बनी रह सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

Pithampur Gas Tragedy Waste न्यायालय के आदेशों की अनदेखी का आरोप

‘पीथमपुर बचाओ समिति’ के अध्यक्ष Hemant Hirale ने कहा कि माननीय न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि इस जहरीली राख को सुरक्षित स्थान पर दफनाया जाए या हटाया जाए, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। समिति का कहना है कि राख में अब भी कई खतरनाक रासायनिक तत्व मौजूद हैं, जो हवा, पानी और मिट्टी को प्रभावित कर सकते हैं।

Pithampur Gas Tragedy Waste स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंता

स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि औद्योगिक कचरे का गलत या अधूरा निस्तारण आने वाले समय में गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा और बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक राख का सुरक्षित निपटान बेहद जरूरी है, क्योंकि यह लंबे समय तक पर्यावरण को प्रभावित कर सकती है। यदि उचित कदम नहीं उठाए गए तो भूजल और आसपास की हवा भी प्रदूषित हो सकती है।

Pithampur Gas Tragedy Waste आगे आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

Pithampur Gas Tragedy Waste
Pithampur Gas Tragedy Waste

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस राख को हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल Pithampur में यह मुद्दा लगातार चर्चा में है और लोग सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि इस संभावित पर्यावरणीय खतरे को टाला जा सके।

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