Restrictions on Parties are Dangerous: बीएनपी ने कार्यकारी आदेश से पार्टियों पर पाबंदी को ‘खतरनाक’ बताया

Fake GST ITC Case

Restrictions on Parties are Dangerous: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने चेतावनी दी है कि किसी भी राजनीतिक दल पर कार्यकारी आदेश के माध्यम से प्रतिबंध लगाना एक “खतरनाक प्रथा” होगी। पार्टी ने ये भी कहा कि केवल अदालतों को ही ऐसे मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद (Salahuddin Ahmed) ने मंगलवार को ढाका में अपने गुलशन स्थित आवास पर पत्रकारों से ये बात कही।

प्रतिबंध लगाने का समर्थन नहीं Restrictions on Parties are Dangerous

बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट यूएनबी ने बीएनपी नेता के हवाले से कहा, “हम किसी भी पार्टी या उसकी गतिविधियों पर कार्यकारी आदेश के जरिए प्रतिबंध लगाने का समर्थन नहीं करते। अगर किसी राजनीतिक संगठन पर नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध या युद्ध अपराध जैसे आरोप हैं, तो उन्हें अदालत में लाया जाना चाहिए।” Salahuddin Ahmed ने कहा कि किसी भी पार्टी का भविष्य न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही तय होना चाहिए और चुनाव आयोग अदालत के फैसले को मानने के लिए बाध्य होगा।

प्रतिबंध लगाने की मांग पर प्रतिक्रिया Restrictions on Parties are Dangerous

कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और कुछ अन्य इस्लामी पार्टियों के बांग्लादेश की जातीय पार्टी और उसके 14-दलीय गठबंधन पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए, बीएनपी नेता ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे मामलों का फैसला कानूनी प्रक्रिया के जरिए होना चाहिए। Salahuddin Ahmed ने कहा, “अगर उनके आरोप सही हैं, तो उन्हें अदालत में उठाने दें। किसी भी अन्य प्रक्रिया के जरिए, कार्यकारी आदेश के जरिए, राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करना एक खतरनाक प्रक्रिया होगी।”

लगभग 28 पंजीकृत दलों ने भाग लिया Restrictions on Parties are Dangerous

बीएनपी नेता Salahuddin Ahmed ने यह भी याद दिलाया कि 2024 के चुनाव में लगभग 28 पंजीकृत दलों ने भाग लिया था। उन्होंने सवाल किया, “अगर फासीवाद या तानाशाही के नाम पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है, तो सभी 28 दलों पर प्रतिबंध लगाना होगा। फिर चुनाव किसके साथ होंगे?” Salahuddin Ahmed ने आगे कहा, “इस देश में, जो लोग अभी राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं—अगर वे बाद में कह दें कि वे भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे, तो क्या चुनाव होंगे ही? ऐसी मांगों के पीछे उनका मकसद अलग हो सकता है। हो सकता है कि वे और दलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग करके अतिरिक्त लाभ हासिल करना चाहते हों।”

मुकदमे के दायरे में आए Restrictions on Parties are Dangerous

अवामी लीग पर प्रतिबंध के बारे में, Salahuddin Ahmed ने कहा कि पार्टी “पहले यह मांग करती है कि अवामी लीग, एक राजनीतिक दल के रूप में, मुकदमे के दायरे में आए और फिर अदालत तय करेगी कि वे राजनीति में बने रह सकते हैं या नहीं।” जमात-ए-इस्लामी और कुछ अन्य इस्लामी दलों के आनुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) और अन्य सुधारों की मांग को पर Salahuddin Ahmed ने कहा कि उनकी पार्टी पीआर प्रणाली का पूरी तरह से विरोध करती है।

पीआर के खिलाफ Restrictions on Parties are Dangerous

उन्होंने कहा, “हम हर जगह (निचले और ऊपरी सदन, दोनों में) पीआर के खिलाफ हैं। अगर कोई पार्टी ऐसा चाहती है, तो उसे इसे अपने घोषणापत्र में शामिल करना चाहिए और जनादेश मांगना चाहिए। अगर जनता इसका समर्थन करती है, तभी वे कानून बना सकते हैं।” बीएनपी नेता ने इस्लामी पार्टियों द्वारा घोषित तीन दिवसीय विरोध कार्यक्रमों को अगले साल होने वाले चुनाव को पटरी से उतारने का एक स्पष्ट प्रयास बताया।

Read Also: दोस्ती, सपनों और संघर्ष की अनकही दास्तान, ‘ Homebound’ का ट्रेलर हुआ रिलीज

Also Read: nepal gen z protest in hindi नेपाल में विरोध प्रदर्शनों का हवाई सेवाओं पर असर: दो विमानों को बिना लैंडिंग लौटे वापस भारत

Also Read:PM Narendra Modi: ‘सरकार पीड़ितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है’, हिमाचल और पंजाब के लिए रवाना होने से पहले बोले पीएम मोदी

Also Read:Dhankhar 50 Days of Silence: हैरान करती है धनखड़ की 50 दिन की खामोशी: कांग्रेस

Also Read:Sudarshan Reddy Denies Cross Voting: उपराष्ट्रपति चुनाव-विपक्ष के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी का क्रॉस वोटिंग से इनकार, खड़गे बोले- जीत तय

Follow us : Facebook

📲 Join WhatsApp Channel

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp Facebook X
📲 Join WhatsApp