कैथल: Wheat crop protection and heat management measures कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ रविंद्र सिंह ने बताया कि मार्च माह बढ़ते तापमान के कारण गेंहू की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। तापमान तेजी से बढऩे के कारण गेहूं के दानों के भराव की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे दाने छोटे और हल्के रह जाते हैं तथा कुल उत्पादन में कमी आ सकती है।कृषि विश्वविद्यालय हिसार के विशेषज्ञों ने किसानों को समय रहते उचित प्रबंधन हेतु सलाह दी गई है कि यदि दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाए तो फसल पर गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए 2 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का छिडक़ाव करना लाभकारी रहता है।
कृषि विश्वविद्यालय हिसार के विशेषज्ञों ने यह भी बताया Wheat crop protection and heat management measures
इसके लिए 2 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट को 100 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ फसल पर छिडक़ाव किया जा सकता है। आवश्यकता होने पर यह छिडक़ाव 10 दिन के अंतराल पर दो बार किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसानों को फसल में आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है, ताकि खेत में पर्याप्त नमी बनी रहे और अधिक तापमान का प्रभाव कम हो सके। साथ ही तेज हवा चलने के समय सिंचाई न करने की भी सलाह दी गई है, क्योंकि इससे फसल गिरने की संभावना बढ़ जाती है। है।कृषि विश्वविद्यालय हिसार के विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि जिन गेहूं के खेतों में मंडूसी/कनकी के पौधे दिखाई दें, उन्हें हाथ से उखाडक़र खेत से बाहर कर देना चाहिए ताकि उनके बीज खेत में न गिरें और अगले वर्ष उनका प्रकोप कम रहे।
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अब तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर यह रोग स्वत Wheat crop protection and heat management measures

पीला रतुआ (येलो रस्ट) रोग के संबंध में भी किसानों को आश्वस्त किया गया है कि अब तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर यह रोग स्वत: समाप्त होने लगता है, इसलिए इसके नियंत्रण के लिए इस समय फफूंदनाशक दवाओं के छिडक़ाव की आवश्यकता नहीं है। उपनिदेशक ने किसानों से अपील की है कि वे इन वैज्ञानिक की सलाहों का पालन कर अपनी गेहूं की फसल को अधिक तापमान के दुष्प्रभाव से बचाए और बेहतर उत्पादन प्राप्
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