नोएडा, 18 मार्च:
Haryana News IMS Law College Presentation Competition Feminism Legal Perspective: आईएमएस लॉ कॉलेज के नयी पहल ज्यूरिस एकेडमिया सोसाइटी ने धर्मों के पार नारीवादी आंदोलनों एक सामाजिक विधिक दृष्टिकोण विषय पर प्रेजेंटेशन प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया। सेक्टर 62 स्थित संस्थान परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को धार्मिक परिप्रेक्ष्यों में नारीवादी आंदोलनों का गहन विश्लेषण तथा उनके सामाजिक एवं विधिक प्रभावों को समझने के लिए प्रेरित किया गया। प्रतिस्पर्धा से पूर्व प्रतिभागियों को शोध पद्धति, केस लॉ विश्लेषण एवं प्रभावी प्रस्तुति कौशल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
Related Posts
- CJP Protest Jantar Mantar: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का बड़ा ऐलान, 20 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी
- फतेहाबाद मताना गांव के एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौके पर ही मौत Fatehabad Road Accident
- Abhishek Banerjee House Raid: अभिषेक बनर्जी के घर तड़के पुलिस की छापेमारी, ताला तोड़कर की गई तलाशी; बंगाल की राजनीति में मचा हड़कंप
प्रतिस्पर्धा को दो श्रेणियों में विभाजित कर आयोजित Haryana News IMS Law College Presentation Competition Feminism Legal Perspective
नयी पहल ज्यूरिस एकेडमिया सोसाइटी की संयोजक प्रो. स्वाती त्यागी ने बताया कि बुधवार को प्रतिस्पर्धा को दो श्रेणियों में विभाजित कर आयोजित की गई। प्रथम श्रेणी में सामाजिक आंदोलनों पर प्रस्तुति तथा द्वितीय श्रेणी में केस लॉ प्रस्तुति पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। प्रतिस्पर्धा के दौरान 15 प्रतिभागियों ने सती प्रथा उन्मूलन, बाल विवाह, महिला शिक्षा, व्यक्तिगत विधि सुधार तथा महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों जैसे विषयों पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं प्रतिस्पर्धा का मूल्यांकन प्रोफेसर (डॉ.) भाविश गुप्ता, व्यास कुमार यादव एवं डॉ. सचिन गोयल की निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। प्रतिस्पर्धा में निमिषा त्रिपाठी एवं अदीबा जंग प्रथम स्थान पाकर विजेता बनी। वहीं आकांक्षा बाजपेयी प्रथम उपविजेता तथा शाहीन खान द्वितीय उपविजेता रहीं।
प्रतियोगिताएं अत्यंत आवश्यक Haryana News IMS Law College Presentation Competition Feminism Legal Perspective
आईएमएस लॉ कॉलेज की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजुम हसन ने कहा कि छात्रों में समालोचनात्मक सोच, विधिक जागरूकता एवं प्रभावी व्यक्तित्व कौशल के विकास के लिए इस प्रकार की प्रतियोगिताएं अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक आयोजनों से विद्यार्थियों में न केवल विषय की गहन समझ विकसित होती है, बल्कि उनमें विश्लेषणात्मक सोच, शोध क्षमता एवं प्रभावी अभिव्यक्ति कौशल का भी विकास होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को समकालीन सामाजिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाती हैं तथा उन्हें भविष्य के जिम्मेदार विधि-विशेषज्ञ बनने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही, यह कार्यक्रम लिंग न्याय एवं नारीवादी आंदोलनों के सामाजिक-विधिक पहलुओं पर सार्थक संवाद को भी प्रोत्साहित करता है।
Also Read: गाली-गलौज के विरोध पर क्यों हुई मारपीट: Physical Assault Following Protest
Follow Us: X (Twitter) Cleck Here
Follow Us: Youtube
Related Posts
- CJP Protest Jantar Mantar: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP का बड़ा ऐलान, 20 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी
- फतेहाबाद मताना गांव के एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौके पर ही मौत Fatehabad Road Accident
- Abhishek Banerjee House Raid: अभिषेक बनर्जी के घर तड़के पुलिस की छापेमारी, ताला तोड़कर की गई तलाशी; बंगाल की राजनीति में मचा हड़कंप

