- मचाडो पर षड्यंत्र, घृणा फैलाने और आतंकवाद का लगा है आरोप, छिप के रह रही हैं
Machado Nobel Prize: नोबेल पुरस्कार विजेता और वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो अगर शांति पुरस्कार लेने नॉर्वे जाती हैं तो उन्हें ‘भगोड़ा’ करार दिए जाने का खतरा है। कोरिना मचाडो को लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए पिछले महीने नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी। वेनेजुएला में मचाडो के खिलाफ आतंकवाद से जुड़े आरोपों समेत कई आपराधिक मामले दर्ज होने से उन्हें व्यक्तिगत रूप से पुरस्कार लेने जाने से मना करना पड़ सकता है।
कोरिना मचाडो कथित तौर पर देश में छिपी Machado Nobel Prize
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 58 साल की कोरिना मचाडो कथित तौर पर देश में छिपी हैं। वेनेजुएला की इस राजनीतिज्ञ ने पिछले सप्ताह 10 दिसंबर के समारोह के लिए नॉर्वे के शहर ओस्लो की यात्रा करने की इच्छा जताई थी। हालांकि एक रिपोर्ट के मुताबिक वेनेजुएला के अटॉर्नी जनरल तारेक विलियम साब ने चेतावनी दी है कि वह कई आपराधिक मामलों का सामना कर रही हैं और यदि वह शांति पुरस्कार लेने विदेश जाती हैं तो उन्हें ‘भगोड़ा’ घोषित किया जाएगा।
2024 से मचाडो छिपी हुई Machado Nobel Prize
विलियम साब ने बताया कि वेनेजुएला से बाहर रहने और कई आपराधिक जांचों के कारण उन्हें भगोड़ा माना जाता है। कोरिना मचाडो पर षड्यंत्र, घृणा भड़काने और आतंकवाद के कृत्यों का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2024 से मचाडो छिपी हुई हैं। उस समय मादुरो ने खुद को तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित घोषित करने के बाद विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक मचाडो ने पिछले महीने एक साक्षात्कार में कहा था कि निकोलस मादुरो ने मुझ पर आतंकवाद का आरोप लगाया था और उन्हें छिपना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उनके ज्यादातर सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बचे हुए छिप गए या निर्वासन में चले गए हैं।
15 महीने से एकांतवास में Machado Nobel Prize
उन्होंने कहा कि करीब 15 महीने से वह एकांतवास में हैं और उन्हें इस बात का अहसास है कि अगर वे उन्हें ढूंढ भी लेंगे तो उन्हें गायब कर ही देंगे। विश्लेषकों का मानना है कि अपनी जान और आज़ादी को जोखिम में डाले बिना, मचाडो शायद देश के अंदर रहकर ही नोबेल पुरस्कार स्वीकार करेंगी। यह सवाल इस समय वेनेजुएला की राजनीति और अंतररष्ट्रीय मानवाधिकार आंदोलनों के केंद्र में है। कोरिना मचाडो का नॉर्वे जाने का फैसला उनके राजनीतिक करियर और वेनेजुएला में लोकतंत्र की लड़ाई के लिए अत्यंत जोखिम भरा और अहम कदम होगा।
पुरस्कार स्वीकार कर सकती हैं Machado Nobel Prize
रिपोर्ट के मुताबिक मचाडो वेनेजुएला से ही वर्चुअली या वीडियो संदेश के जरिए पुरस्कार स्वीकार कर सकती हैं। इससे वह अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा तय कर पाएंगी और देश के अंदर रहकर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जारी रख सकेंगी। वह अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का सामना वेनेजुएला की कोर्ट में कर सकती हैं। सरकार उन पर कानूनी दबाव बनाए रखेगी, लेकिन देश के अंदर उनकी उपस्थिति विरोधियों को जुटाए रखने में मदद करेगी। हालांकि उनके ना जाने के फैसले से नोबेल समिति या समर्थकों को निराशा हो सकती है।
कोरिना मचाडो की जांच चल रही Machado Nobel Prize
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कैरिबियन सागर और उसके आसपास के क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य बलों की तैनाती का समर्थन करने के लिए भी कोरिना मचाडो की जांच चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत, युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को तैनात किया है, जिसे वाशिंगटन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के वेनेजुएला शासन के खिलाफ एक मादक पदार्थ-विरोधी अभियान बता रहा है हालांकि, मादुरो का दावा है कि ट्रंप का कदम वामपंथी सरकार को गिराने के लिए है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना Machado Nobel Prize
बता दें वेनेजुएला 2015 से ही अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इससे पहले ट्रंप ने अगस्त 2017 में अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान सार्वजनिक रूप से वेनेजुएला पर सैन्य आक्रमण का संकेत दिया था। उनके दूसरे कार्यकाल में कूटनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे फिर सैन्य कार्रवाई के संकेत मिलते हैं। वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता मचाडो ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का स्वागत किया है।
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