नई दिल्ली: NEET पेपर लीक (NEET UG 2026) मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब राजस्थान के चर्चित बिवाल परिवार को लेकर नई जानकारी सामने आई है, जिसने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी मांगीलाल बिवाल के बेटे अमन बिवाल ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और वह प्रॉपर्टी के कारोबार में सक्रिय था। इसके बावजूद परिवार ने उसे NEET परीक्षा में बैठाया। जांच एजेंसियों को शक है कि उसे पेपर लीक नेटवर्क की मदद से परीक्षा दिलाई गई थी।
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कमजोर पढ़ाई के बावजूद मेडिकल कॉलेज में दाखिला (NEET UG 2026)
जांच के दौरान विकास बिवाल का नाम भी सामने आया है, जो फिलहाल राजस्थान के Sawai Madhopur Medical College में MBBS प्रथम वर्ष का छात्र बताया जा रहा है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार विकास की पढ़ाई शुरुआत से ही कमजोर रही है।
उसकी क्लास में उपस्थिति भी बेहद कम थी। जनवरी से अप्रैल के बीच वह मुश्किल से 10 दिन कॉलेज गया था। इतना ही नहीं, प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में उसे केवल 30 प्रतिशत अंक मिले थे। कॉलेज के कुछ अधिकारियों का कहना है कि उसके प्रदर्शन को देखकर पहले से ही उसके एडमिशन पर सवाल उठ रहे थे।
पूछताछ में बड़ा कबूलनामा
जांच एजेंसियों के मुताबिक पूछताछ के दौरान विकास बिवाल ने स्वीकार किया है कि उसे NEET 2025 का प्रश्नपत्र परीक्षा (NEET UG 2026) से पहले ही मिल गया था। इस बयान के बाद जांच और तेज हो गई है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर लीक का नेटवर्क कहां से संचालित हो रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
10 लाख रुपये देकर खरीदा गया था पेपर
मामले में आरोपी दिनेश बिवाल को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। जांचकर्ताओं का दावा है कि दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि बिवाल के लिए कथित तौर पर लगभग 10 लाख रुपये देकर लीक प्रश्नपत्र (NEET UG 2026) हासिल किया था। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि पेपर पहले से मिलने के बावजूद ऋषि परीक्षा में केवल 107 अंकों के सवाल ही हल कर पाया।
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ग्रेस मार्क्स को लेकर भी उठे सवाल
जांच के दौरान ऋषि बिवाल की मार्कशीट भी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह ग्रेस मार्क्स की मदद से परीक्षा (NEET UG 2026) पास कर पाया था। इसके बाद अब पूरे चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे हैं। एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे रैकेट का बड़ा हिस्सा राजस्थान के सीकर इलाके से ऑपरेट किया जा रहा था, जिसे कोचिंग हब के तौर पर जाना जाता है।
जांच एजेंसियां नेटवर्क की तलाश में जुटीं
फिलहाल जांच एजेंसियां इस मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही हैं। कई संदिग्धों से पूछताछ जारी है और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। इस मामले ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों मेहनती छात्रों और उनके परिवारों के बीच भी इस खबर के बाद नाराजगी और चिंता का माहौल है।
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