कानपुर:SIT in fake degree case बिना परीक्षा दिलाए फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां उपलब्ध कराने वाले गिरोह के खुलासे के बाद अब पुलिस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की तैयारी में जुट गई है। पुलिस आयुक्त कानपुर नगर के आदेश पर 14 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। यह टीम उन प्रभावशाली लोगों की भूमिका की पड़ताल करेगी, जो पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे रैकेट को संचालित कर रहे थे।
सहायक पुलिस आयुक्त विपिन ताडा ने शनिवार को बताया SIT in fake degree case
सहायक पुलिस आयुक्त विपिन ताडा ने शनिवार को बताया कि गिरोह के सरगना गणित शिक्षक शैलेंद्र की गिरफ्तारी के बाद उससे की गई गहन पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। शुरुआती दौर में वह एडमिशन एजेंट के तौर पर काम करता था, लेकिन बाद में उसने नौ राज्यों की 14 यूनिवर्सिटियों में अपने संपर्क स्थापित कर लिए। इसी नेटवर्क के जरिए छात्रों को बिना परीक्षा दिलाए डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराई जाती थीं।
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पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह बीटेक SIT in fake degree case
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह बीटेक, बी.फार्मा और एलएलबी जैसी डिग्रियों के लिए तय रकम वसूलता था, जिसमें से करीब 40 प्रतिशत हिस्सा एजेंटों के पास रहता था और शेष राशि विश्वविद्यालयों में कार्यरत क्लर्क व कर्मचारियों तक पहुंचाई जाती थी। हालिया छापेमारी में पुलिस ने 900 से अधिक फर्जी दस्तावेज जब्त किए थे।
अब एडिशनल डीसीपी दक्षिण योगेश कुमार की निगरानी SIT in fake degree case

अब एडिशनल डीसीपी दक्षिण योगेश कुमार की निगरानी में 14 सदस्यीय गठित एसआईटी टीम संबंधित 14 विश्वविद्यालयों से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की जांच करेगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि गिरोह अपने ‘ग्राहकों’ तक कैसे पहुंचता था और फर्जीवाड़े की पूरी कार्यप्रणाली क्या थी।
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