Tributes paid on Rani Velu Nachiyar Jayanti, नई दिल्ली: भारत की प्रारंभिक महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक रानी वेलु नचियार की जयंती के अवसर पर देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने अच्छे शासन और सांस्कृतिक गर्व के लिए उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
सीपी राधाकृष्णन ने ‘एक्स’ पर लिखा Tributes paid on Rani Velu Nachiyar Jayanti
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “महिलाओं की ताकत और नेतृत्व की एक अमर प्रतीक वीरामंगई रानी वेलु नचियार की जयंती पर मैं भारत की प्रारंभिक महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक को अपनी श्रद्धांजलि देता हूं।”
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असाधारण नेतृत्व का उदाहरण पेश किया Tributes paid on Rani Velu Nachiyar Jayanti
उन्होंने आगे लिखा, “एक बहादुर शासक और दूरदर्शी नेता के रूप में वह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहीं और साहस, रणनीतिक समझ व असाधारण नेतृत्व का उदाहरण पेश किया। उनकी अमिट विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती है, खासकर महिलाओं को, साहस, गरिमा और देशभक्ति की भावना को मजबूत करके जो आज देश का मार्गदर्शन करती है।”
रानी वेलु नचियार जयंती पर श्रद्धांजलि Tributes paid on Rani Velu Nachiyar Jayanti
प्रधावनंत्री नरेंद्र मोदी ने रानी वेलु नचियार को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “उन्हें भारत की प्रारंभिक बहादुर योद्धाओं में से एक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अदम्य साहस और अद्वितीय रणनीतिक कौशल का परिचय दिया। वह औपनिवेशिक दमन के खिलाफ उठीं और भारतीयों के खुद पर राज करने के अधिकार पर जोर दिया। अच्छे शासन और सांस्कृतिक गर्व के लिए उनकी प्रतिबद्धता भी तारीफ के काबिल है। उनका त्याग और दूरदर्शी नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।”
मिलनाडु में शिवगंगई रियासत Tributes paid on Rani Velu Nachiyar Jayanti
3 जनवरी 1730 को जन्मी वेलु नचियार 18वीं शताब्दी के दौरान वर्तमान तमिलनाडु में शिवगंगई रियासत की रानी थीं। रानी वेलु नचियार युद्ध कलाओं और तीरंदाजी में प्रशिक्षित थीं। उन्हें फ्रांसीसी, उर्दू और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में भी निपुणता हासिल थी।
पहली रानी के रूप में जाना जाता है Tributes paid on Rani Velu Nachiyar Jayanti
रानी वेलु नचियार को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली पहली रानी के रूप में जाना जाता है। 1780 में रानी वेलु नचियार अंग्रेजों से निडर होकर लड़ीं और उन्हें परास्त किया। तमिलनाडु के लोग आज भी उन्हें वीरमंगई यानी बहादुर रानी के नाम से जानते हैं।
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