Ram Rahim: छत्रपति हत्याकांड में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम बरी Gurmeet Ram Rahim acquitted

Gurmeet Ram Rahim acquitted

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की 2002 में गोली मारकर हुई थी हत्या Gurmeet Ram Rahim acquitted

सिरसा। Gurmeet Ram Rahim acquitted करीब दो दशक पुराने चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में उन्हें साजिशकर्ता साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं। हालांकि अदालत ने तीन अन्य दोषियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल—की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने डेरा प्रमुख सहित सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

सबूतों के अभाव का हवाला, तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार Gurmeet Ram Rahim acquitted

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई की ओर से विस्तृत बहस हुई, लेकिन अदालत ने पाया कि गुरमीत राम रहीम के खिलाफ साजिश में शामिल होने के ठोस और पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए जा सके। इसी आधार पर उन्हें बरी करने का फैसला सुनाया गया। वहीं अदालत ने कहा कि कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल के खिलाफ गवाहों और सबूतों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से साबित होती है, इसलिए उनकी सजा बरकरार रहेगी।

2002 में हुई थी हत्या

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार पूरा सच में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कई गंभीर आरोप प्रकाशित किए थे। इन खुलासों के बाद वर्ष 2002 में अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी थी। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी विरोध हुआ और मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। लंबी जांच और सुनवाई के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख समेत अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम को इससे पहले डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड में भी हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है। हालांकि इस फैसले को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है।

फिलहाल जेल में ही रहेंगे 

हालांकि डेरा प्रमुख राम रहीम को साध्वियों के यौन शोषण मामले में 10 साल की सजा हो चुकी है। इसी कारण वे फिलहाल जेल में ही रहेंगे। यह फैसला एक बार फिर बहुचर्चित छत्रपति हत्याकांड को लेकर नए सवाल और बहस को जन्म दे सकता है।

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