Chandigarh अवैध ऑटो साम्राज्य: दूसरे राज्यों के तीन पहिया वाहन नियम तोड़ते बेरोक, प्रदूषण फैला रहे, जबकि स्थानीय अनुज्ञापत्र वाले चालक बेरोजगार Chandigarh Illegal Auto Rikshaw

One killed, six injured in car-auto collision, Chandigarh Illegal Auto Rikshaw

चंडीगढ़: Chandigarh Illegal Auto Rikshaw शहर की सड़कों पर यातायात का कहर बन चुके अवैध ऑटो रिक्शा अब ‘ऑटो-तंत्र’ का रूप ले चुके हैं। पंजाब और हरियाणा से आए हजारों तीन पहिया वाहन न सिर्फ नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि प्रदूषण बढ़ाने में भी आगे हैं। वहीं चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा अनुज्ञापत्र दिए गए स्थानीय ऑटो चालक बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। कोई रोकने वाला नहीं, कोई सख्त कार्रवाई नहीं – यही हालात हैं ‘सुंदर शहर’ के।

Chandigarh Illegal Auto Rikshaw चंडीगढ़ प्रशासन ने संपीड़ित प्राकृतिक गैस/द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस ऑटो के लिए कुल 6000 अनुज्ञापत्र की सीमा तय की हुई है। लेकिन राज्य परिवहन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 3000 से ज्यादा ऑटो का नवीनीकरण सालों से लंबित है। सूचना जारी किए गए, लेकिन ज्यादातर अनदेखे रहे या गलत पते पर लौट आए। नतीजा? ये सब अवैध रूप से सड़कों पर दौड़ रहे हैं।  लेकिन असली समस्या दूसरे राज्यों की है। पंजाब और हरियाणा से पंजीकृत 10000 से ज्यादा ऑटो चंडीगढ़ में बिना किसी अनुज्ञापत्र के घूम रहे हैं। जबकि राज्य परिवहन प्राधिकरण ने दोनों राज्यों के लिए सिर्फ 400-400 का कोटा तय किया है। यानी 1000 से ज्यादा पूरी तरह अवैध! 2019 से ही ये समस्या चली आ रही है, जब पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रशासन को नीति बनाने को कहा था, लेकिन आज भी कोई नियामक नीति नहीं बनी। नतीजतन, हरियाणा-पंजाब के ऑटो बिना वर्दी, बिना दस्तावेज, बीच सड़क रुककर यात्री उठाते और साइकिल पथ-पैदल पथ पर कब्जा जमाते दिखते हैं।

नियम तोड़ने में कोई रोक-टोक नहीं, प्रदूषण फैलाने में आगे Chandigarh Illegal Auto Rikshaw

यातायात पुलिस और राज्य परिवहन प्राधिकरण की तरफ से जुर्माना तो कट रहे हैं – चालू वित्तीय वर्ष (2025-26) के पहले 8 महीनों में ही यात्री ऑटो पर 830 जुर्माने हुए। लापरवाह चलाना, अधिक भार ढोना और अवैध ठहराव मुख्य वजहें। पिछले तीन सालों में औसतन रोज 4 जुर्माने। लेकिन ये सिर्फ आंकड़े हैं – असल में सड़क क्षमता से ज्यादा ऑटो चलने से यातायात जाम, महिलाओं की सुरक्षा को खतरा और योजना बिगड़ रही है। कर्मचारियों की कमी के चलते बड़े अभियान नहीं चलाए जा रहे, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन कमजोर है तो यात्री प्रभावित होंगे।
प्रदूषण का पहलू और गंभीर है। चंडीगढ़ प्रशासन ने पेट्रोल-डीजल ऑटो पर प्रतिबंध लगाकर विद्युतीय रिक्शा को बढ़ावा दिया है। 2024 तक सैकड़ों विद्युतीय रिक्शा और विद्युतीय ऑटो पंजीकृत हुए। लेकिन अवैध पुराने संपीड़ित प्राकृतिक गैस/द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस और संभवतः कुछ डीजल वाले तीन पहिया वाहन (पड़ोसी राज्यों से) अभी भी धुआं उगल रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण नियमों के बावजूद ये बेरोक दौड़ रहे हैं, जो शहर की हवा को और खराब कर रहे हैं।

स्थानीय चालक बेरोजगार, प्रशासन के अनुज्ञापत्र बेकार Chandigarh Illegal Auto Rikshaw

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चंडीगढ़ राज्य परिवहन प्राधिकरण ने करीब 6000 स्थानीय ऑटो चालकों को अनुज्ञापत्र दिए थे ताकि रोजगार मिले। लेकिन अवैध ऑटो की बाढ़ से इनकी कमाई छिन गई। यात्री अवैध ऑटो को सस्ता और आसानी से मिल जाने के चक्कर में स्थानीय अनुज्ञापत्र वाले चालकों को ठुकरा रहे हैं। नतीजा – कई चालक बेरोजगार या आधे समय बेकार बैठे। हाल ही में (जनवरी-फरवरी 2026) टैक्सी और ऑटो चालकों ने विरोध प्रदर्शन भी किए, जिसमें अवैध सेवा और कम आय की शिकायत की गई। स्थानीय चालक कहते हैं, “हम अनुज्ञापत्र नवीनीकरण करवाते हैं, कर भरते हैं, लेकिन बाहर के ऑटो बिना कुछ दिए लूट रहे हैं। प्रशासन क्यों नहीं रोकता?”

क्या कहते हैं अधिकारी? Chandigarh Illegal Auto Rikshaw

एक वरिष्ठ संघ राज्य क्षेत्र अधिकारी ने कहा, “अवैध ऑटो यातायात भीड़ बढ़ा रहे हैं और सुरक्षा जोखिम पैदा कर रहे हैं। लेकिन सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण बड़े कदम में मुश्किल है।” राज्य परिवहन प्राधिकरण ने सूचना भेजे, लेकिन असर शून्य। विद्युतीय रिक्शा पर भी प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की शिकायतें बढ़ रही हैं, जो और अराजकता पैदा कर रही हैं।

समाधान की मांग Chandigarh Illegal Auto Rikshaw

ऑटो संघ और स्थानीय निवासी अब सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कोटा सख्ती से लागू हो, अवैध ऑटो जब्त किए जाएं, विद्युतीय वाहनों को बढ़ावा दिया जाए और स्थानीय चालकों को रोजगार सुरक्षा दी जाए। नहीं तो चंडीगढ़ की सड़कें सिर्फ जाम और प्रदूषण की भेंट चढ़ती रहेंगी। प्रशासन अगर अभी नहीं जागा तो ये अवैध ऑटो साम्राज्य शहर की सुंदरता और स्वच्छता दोनों को नष्ट कर देगा। क्या चंडीगढ़ प्रशासन अब कुछ कदम उठाएगा? या फिर ‘कुछ नहीं’ का सिलसिला जारी रहेगा?

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