Chandigarh Traffic Police के पास चालान काटने की अनुमति है, न किसी को रोकने की पावर। फिर इस विभाग में तैनात सैकड़ों पुलिसकर्मियों को महीने की सैलरी क्यों दी जा रही

NDPS Act Cases Himachal
चंडीगढ़: Chandigarh Traffic Police चंडीगढ़ की सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की भूमिका को लेकर आम जनता में गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग खुलकर कह रहे हैं –इनका नाम बदलकर रूट पुलिस कर दो! VVIP लोगों को जाम से जल्दी निकालने वाली पुलिस! कारण? न तो इनके पास चालान काटने की अनुमति है, न किसी को रोकने की पावर। फिर इस विभाग में तैनात सैकड़ों पुलिसकर्मियों को महीने की सैलरी क्यों दी जा रही है? क्या ये सिर्फ VIP काफिलों के लिए ‘रास्ता साफ’ करने का काम कर रहे हैं?
दरअसल, यह मांग कोई अचानक नहीं उठी। अगस्त 2025 में चंडीगढ़ के DGP सागर प्रीत हुड्डा ने साफ निर्देश जारी किए थे – ट्रैफिक पुलिस का मुख्य काम अब ट्रैफिक फ्लो मैनेजमेंट है, फाइन नहीं। बाकी सब कैमरों पर छोड़ दो। कोई भी वाहन बिना वजह नहीं रोका जाएगा, खासकर आउट ऑफ स्टेट नंबर प्लेट वाले।

हम यहां सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं, डर पैदा करने के लिए नहीं Chandigarh Traffic Police

DGP ने साफ कहा था –हम यहां सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं, डर पैदा करने के लिए नहीं।इसके पीछे वजह थी वायरल वीडियो और शिकायतें, जिसमें ट्रैफिक पुलिसकर्मी आउटस्टेशन वाहनों को बिना वजह रोककर पैसे मांगते दिखे। एक वीडियो में तो कांस्टेबल को 500 रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया, जिस पर सस्पेंड भी किया गया।अब स्थिति यह है कि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगे 2130 CCTV कैमरों और 1015 ITMS कैमरों से ऑटोमैटिक ई-चालान कटते हैं। ट्रैफिक लाइट पॉइंट पर तैनात पुलिसकर्मी सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल करते हैं – रोकना नहीं, चालान नहीं। नतीजा? आम आदमी को लगता है कि पुलिस का काम अब सिर्फ VIP/VVIP काफिलों के लिए रास्ता साफ करना रह गया है।

Chandigarh पुलिस की सलाह Chandigarh Traffic Police

Chandigarh Traffic Police पिछले कुछ महीनों में ही Chandigarh और ट्राइसिटी में VIP मूवमेंट के चलते कई बार घंटों जाम लगे। अमित शाह की विजिट हो या हरियाणा CM की शपथ ग्रहण समारोह – सड़कें बंद, डायवर्शन, आम आदमी फंसकर रह जाता है। पुलिस की सलाह आती है – वैकल्पिक रूट अपनाएं, धैर्य रखें।” लेकिन VVIP काफिला? वो फटाफट निकल जाता है! लोगों का सवाल है – क्या ट्रैफिक पुलिस अब सिर्फ ‘रूट क्लियरिंग फोर्स’ बन गई है? अब सिर्फ VIP गाड़ियों के आगे-पीछे घूमते दिखते हैं। आम गाड़ी अगर गलती करे तो कैमरा काटेगा, लेकिन रोककर समझाएंगे नहीं। फिर इनकी सैलरी किस काम की? टैक्सपेयर का पैसा बर्बाद! ये तो VVIP के लिए जाम से निकालो पुलिस’ बन गए।ट्रैफिक विशेषज्ञों का कहना है कि DGP का फैसला भ्रष्टाचार रोकने और हेल्दी ट्रैफिक फ्लो के लिए सही था, लेकिन इसका साइड इफेक्ट यह हुआ कि ग्राउंड पर पुलिस की मौजूदगी नाममात्र की रह गई। चंडीगढ़ में 40 बड़े ट्रैफिक पॉइंट्स पर ऑटोमैटिक क्यू डिटेक्शन सिस्टम लगा है, जो खुद लाइट का टाइमिंग तय करता है। फिर मैनुअल पुलिस की जरूरत ही क्या?
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