Congress will reach out to voters गुजरात में ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचेगी कांग्रेस

Investigation of Foreign Trips

नई दिल्ली गुजरात विधानसभा चुनाव में पूरे दो साल बाकी है, पर चुनावी जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस कोई कोर कसर बाकी नही रखना चाहती। पार्टी ने जहां सत्ता विरोधी लहर को तेज करने के लिए दो माह लंबी जन आक्रोश यात्रा शुरु की है, वहीं संगठन में बदलाव करते हुए युवा नेतृत्व को अहम जिम्मेदारियां सौंपी है। कांग्रेस गुजरात में तीन दशक से सत्ता से बाहर है। लोकसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी संभालने के बाद राहुल गांधी वर्ष 2027 में भाजपा को हराने की बात कह चुके हैं। बिहार में महागठबंधन की हार ने पार्टी को रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। इसलिए पार्टी ने अभी से कार्यक्रम शुरु कर दिए हैं। आम आदमी से जुड़े मुद्दों को लेकर जहां 11 सौ किमी लंबी जन आक्रोश यात्रा कर रही है। वहीं, पार्टी ने यात्रा से दूसरे जिलों में बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं को लेकर नुक्कड़ सभाएं और छोटे छोटे कार्यक्रम कर रही है। इसके अलावा लोगों से चर्चा कर स्थानीय मुद्दों की भी सूची तैयार कर रही है। प्रदेश में नए सिरे से संगठन तैयार करने के लिए पार्टी ने जहां अपना गुजरात मॉडल तैयार किया है।

प्रदेश के इतिहास में पहली बार पार्टी ने जिला अध्यक्षों का दस दिवसीय शिविर आयोजित किया ताकि, जिला अध्यक्षों को संगठन और विचारधारा का पाठ पढाया जा सके। क्योंकि, ज्यादातर बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी संभालने के बाद राहुल गांधी 2027 के चुनाव में भाजपा को हराने की बात कह चुके हैं। पर पार्टी के लिए यह आसाम नहीं है। यही वजह है कि पार्टी ने मुकुल वासनिक जैसे अनुभवी प्रभारी के साथ यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी को प्रभारी सचिव नियुक्त किया है। सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस ने 2017 में अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था। पार्टी ने इन चुनाव में 77 सीट जीती थी और भाजपा को भी 99 सीट पर रोक दिया था। पर वर्ष 2022 के चुनाव में कांग्रेस सिर्फ 17 सीट जीत पाई। इनमें से भी पांच विधायक पार्टी का हाथ छोड़ चुके हैं। ऐसे में पार्टी के पास सिर्फ 12 विधायक है।

बंगाल में दिसंबर से मोदी-शाह बजाएंगे चुनावी बिगुल

कोलकाता बिहार विधानसभा चुनाव में निर्णायक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी अब पश्चिम बंगाल को अगला बड़ा राजनीतिक लक्ष्य बनाकर चुनावी अभियान शुरू कर रही है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व दिसंबर से ही राज्य में हाई-प्रोफाइल रैलियों की श्रृंखला शुरू करेगा, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बारी-बारी से जनता को संबोधित करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, योजना यह है कि चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा होने तक हर महीने दो बड़ी जनसभाएं की जाएं। इनमें एक प्रधानमंत्री की और दूसरी गृह मंत्री की। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद इन रैलियों की संख्या और भी बढ़ाई जाएगी।

भाजपा की राज्य कमेटी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राज्य अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य इस सप्ताह दिल्ली जाकर संभावित तारीखों और स्थानों को अंतिम रूप देंगे। कोशिश ऐसे इलाकों को चुनने की है जहां से एक साथ कई जिलों में प्रभाव डाला जा सके। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने 13 या 14 दिसंबर को हुगली जिले के आरामबाग में रैली की अनुमति के लिए प्रशासन से आग्रह किया है। अगर प्रधानमंत्री कार्यालय मंजूरी देता है तो यह रैली बंगाल में भाजपा के चुनाव अभियान की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह के भी दिसंबर के अंत में राज्य दौरे की संभावना है। 19 दिसंबर के बाद कोलकाता में उनकी एक महत्वपूर्ण बैठक हो सकती है, जिसमें सांगठनिक तैयारियों की समीक्षा और चुनावी रणनीति तय की जाएगी। ओडिशा (2024) और बिहार (2025) में जीत के बाद भाजपा का नया नारा, “2024 में ओडिशा, 2025 में बिहार और 2026 में बंगाल” अब पूरे जोर से उछाला जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी और शाह का शुरुआती जुड़ाव यह संकेत देता है कि पार्टी बंगाल की लड़ाई को लेकर बेहद गंभीर है।

सिम कार्ड के दुरुपयोग पर आप भी जवाबदेह होंगे

नई दिल्ली अगर आपके नाम पर खरीदे गए सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी या किसी अवैध गतिविधि में होता है, तो उसके लिए आपको भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। सोमवार को दूरसंचार विभाग ने इस संबंध में निर्दश जारी करते हुए कहा कि छेड़छाड़ किए गए आईएमईआई नंबर वाले फोन का इस्तेमाल करना, धोखाधड़ी से सिम कार्ड खरीदना या अपना सिम कार्ड दूसरों को देना या साइबर धोखाधड़ी के लिए उनका गलत इस्तेमाल करने वालों को सौंप देने के गंभीर कानूनी नतीजे हो सकते हैं। अगर सिम कार्ड का बाद में गलत इस्तेमाल होता है, तो असली ग्राहक को भी दोषी माना जा सकता है।

इसके साथ ही दूरसंचार विभाग ने ग्राहकों से कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी (सीएलआई) या पहचान बदलने वाले दूसरे ऐप एवं वेबसाइट का उपयोग न करने की हिदायत भी दी है। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत मोबाइल उपयोगकर्ता की पहचान में मददगार आईएमईआई एवं अन्य तरीकों से छेड़छाड़ पर तीन वर्ष तक की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दूरसंचार (दूरसंचार साइबर सुरक्षा) नियम, 2024 किसी भी व्यक्ति को आईएमईआई को बदलने या ऐसे उपकरण का उपयोग करने, उत्पादन करने या रखने से रोकता है जिसमें आईएमईआई संख्या में बदलाव किया जा सकता है। दूरसंचार विभाग ने मोबाइल उपकरणों के आईएमईआई नंबर की पुष्टि ‘संचार साथी’ पोर्टल या ऐप के माध्यम से करने की सलाह दी है। विभाग ने कहा, सरकार ने दूरसंचार संसाधनों का गलत इस्तेमाल रोकने और सभी नागरिकों के लिए एक सुरक्षित दूरसंचार पारिस्थितिकी तैयार करने के लिए सख्त बंदिशें लगाई हैं।

ऑनलाइन दवा विज्ञापनों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

नई दिल्ली  सरकार अब ऑनलाइन मंचों पर दवाइयों के विज्ञापनों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। सरकार का मकसद खुद से दवा लेने की बढ़ती प्रवृत्ति और बिना डॉक्टर की सलाह के असुरक्षित दवाओं की बिक्री को रोकना है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में दवा-विज्ञापन के नियमों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब एंटीबायोटिक्स, मनोवैज्ञानिक दवाओं, हार्मोनल उपचार और बिना मंजूरी लाई गई दवाओं के विज्ञापन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तेजी से दिख रहे हैं। सरकार ने इन्हें रोकने के लिए नए प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया है, जो फिलहाल भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) के पास विचाराधीन है।

इसके तहत दवाओं और सौंदर्य प्रसाधन नियम-1945 में बदलाव कर नियामकीय प्रावधानों को और सख्त किया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि सरकार ऑनलाइन दवा बिक्री पर भी कड़ी निगरानी रख रही है ताकि सभी कंपनियां मौजूदा नियमों का पालन करें। इन पर लगेगा प्रतिबंध अभी तक दवा बेचने के लाइसेंस में विज्ञापन पर कोई स्पष्ट रोक नहीं थी। अब नया नियम यह अनिवार्य करेगा कि लाइसेंस धारक (दवा विक्रेता) खतरनाक और अधिक जोखिम वाली दवाओं, जो बिना डॉक्टरी सलाह (शेड्यूल जी, एच, एच1 और एक्स) के नहीं दी जा सकती, उनका विज्ञापन किसी भी हाल में किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नहीं कर सकते। यह रोक दवा बेचने वाले विक्रेता, थोक व्यापारी, वितरक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (ई-फार्मेसी) चलाने वाली सभी कंपनियों पर लगेगी।

क्या हैं प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं शेड्यूल एच, एच1 और एक्स जैसी दवाएं इतनी खतरनाक मानी जाती हैं कि इन्हें डॉक्टर की पर्ची के बिना बेचा ही नहीं जा सकता। इनके रिकॉर्ड व भंडारण के सख्त नियम हैं। अब इनका ऑनलाइन विज्ञापन भी पूरी तरह से बंद हो जाएगा। दुनिया के कई देशों जैसे यूरोप और सिंगापुर में ऐसी दवाओं के सीधे विज्ञापन पर प्रतिबंध है। इसलिए बदला जा रहा है नियम 1. सेल्फ-मेडिकेशन का ख़तरा: ऑनलाइन विज्ञापनों को देखकर लोग खुद ही गंभीर दवाएं (जैसे एंटीबायोटिक्स, हार्मोनल और मनोरोग की दवाएँ) खरीद लेते हैं। इससे बीमारी का सही इलाज नहीं हो पाता और लोगों की सेहत को खतरा होता है। 2. एंटीबायोटिक बेअसर: विशेषज्ञों का कहना है कि जब लोग बिना जरूरत के एंटीबायोटिक्स खाते हैं, तो शरीर में ‘रोगाणुरोधी प्रतिरोध’ बढ़ जाता है। इसका मतलब है कि भविष्य में जब कोई गंभीर संक्रमण होगा, तो दवाएं काम करना बंद कर देंगी। 3. अवैध और नकली दवाएं: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार ऐसी दवाओं के भी विज्ञापन दिखते हैं जो नकली होती हैं या जिन्हें देश में बेचने की मंजूरी नहीं होती है।

कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी अगले साल भारत आएंगे

नई दिल्ली/जोहानिसबर्ग कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अगले साल भारत की यात्रा करेंगे। दक्षिण अफ्रीका में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्नी को भारत आने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने रविवार बताया कि प्रधानमंत्री कार्नी ने 2026 की शुरुआत में भारत आने के प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। बयान में कहा गया कि दोनों नेताओं ने वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के अलावा रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों में गहन सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर सहमति व्यक्त की। वर्ष 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने के आरोपों के बाद भारत-कनाडा संबंध बेहद खराब हो गए थे। भारत ने ट्रूडो के आरोपों को बेतुका बताकर खारिज कर दिया था। दोनों पक्षों ने हाल के महीनों में अपने संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं।

केवल सिंध क्यों, पूरा पाकिस्तान लीजिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर बोले कांग्रेस नेता राशिद अल्वी

नई दिल्लीकांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सिंध से जुड़े हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केवल सिंध ही क्यों, संपूर्ण पाकिस्तान को वापस लीजिए। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख बार-बार कहते हैं कि बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान भारत का हिस्सा थे, तो फिर सिर्फ सिंध की बात नहीं होनी चाहिए। सेना को आदेश दिजिए और पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश को वापस लीजिए। उन्होंने भाजपा और उसकी विचारधारा से जुड़े संगठनों पर राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान इलाके में तनाव पैदा करते हैं और जनता को गुमराह करते हैं। सरकार को आर्थिक चुनौतियों, बेरोजगारी और महंगाई पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन वह ऐसे मुद्दे उठाकर भावनाएं भड़काती रहती हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी के कथन का जिक्र करते हुए कहा था कि कौन जानता है, कल सिंध फिर से भारत में वापस आ जाए।

कोचिंग संस्थानों की समीक्षा करेगी संसदीय समिति

नई दिल्ली  छात्रों में बढ़ते तनाव और आत्महत्याओं के बीच एक संसदीय समिति ने कोचिंग सेंटरों के बढ़ते प्रसार तथा इससे जुड़े सामाजिक प्रभावों की समीक्षा करने का फैसला किया है। समिति शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल से जुड़ी स्थायी समिति है। लोकसभा के एक बुलेटिन के अनुसार, समिति कोचिंग सेंटरों से जुड़े मौजूदा कानूनों का अध्ययन करेगी। पिछले वर्षों में कोटा सहित कई शहरों में पढ़ाई के दबाव से छात्रों की आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसके अलावा, समिति शिक्षा क्षेत्र में एआई के प्रभाव और छात्रों को इससे होने वाले संभावित लाभों का भी मूल्यांकन करेगी। साथ ही, 2025-26 में ‘पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया’ (पीएम-श्री) योजना की समीक्षा भी करेगी। बता दें कि शिक्षा मंत्रालय ने इस साल की शुरुआत में नौ सदस्यीय समिति बनाई थी। इसका काम कोचिंग संस्थानों, ‘डमी स्कूलों’ की समस्या और प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता से जुड़े मुद्दों की जांच करना है। यह समिति स्कूल शिक्षा के संदर्भ में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता, कोचिंग उद्योग के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर भी अध्ययन कर रही है।

तालमेल ही सशस्त्र बलों ताकत है: जनरल द्विवेदी

 

मुंबई थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने सोमवार को कहा कि सशस्त्र बलों की ताकत तालमेल में निहित है और ऑपरेशन सिंदूर इसका उपयुक्त उदाहरण है। वह मुंबई में युद्धपोत आईएनएस माहे के जलावतरण के अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह माहे श्रेणी के पनडुब्बी-रोधी उथले जल का प्रथम युद्धपोत है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों की ताकत तालमेल में निहित है। उन्होंने कहा कि समुद्र, भूमि और आकाश राष्ट्रीय सुरक्षा की एक सतत श्रृंखला बनाते हैं और थल सेना, नौसेना और वायु सेना मिलकर भारत की सामरिक शक्ति की त्रिमूर्ति हैं। उन्होंने कहा कि बहु-क्षेत्रीय परिचालन के युग में समुद्र की गहराई से लेकर ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों तक एक साथ मिलकर कार्य करने की देश की क्षमता भारतीय गणराज्य के सुरक्षा प्रभाव को निर्धारित करेगी। भारतीय सेना ने कई पहलें शुरू कीं उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लद्दाख से लेकर हिंद महासागर तक सूचना युद्ध से लेकर संयुक्त रसद तक हर क्षेत्र में सक्रिय हैं। जनरल ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर सशस्त्र बलों के तालमेल का एक उपयुक्त उदाहरण था। भारत ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई की थी।

पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए थे। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना ने परिवर्तन के व्यापक ढांचे के तहत कई पहल शुरू की हैं, जिनमें संयुक्तता और एकीकरण महत्त्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने यह माना है कि आधुनिक संघर्ष बहु-क्षेत्रीय, ‘हाइब्रिड’ होंगे और इसके लिए राष्ट्रीय शक्ति की एकजुटता आवश्यक होगी। पहली बार नौसेना के समारोह में सेना प्रमुख की उपस्थिति एक अधिकारी ने कहा कि यह पहला मौका था जब किसी नौसैन्य पोत के जलावतरण समारोह में सेना प्रमुख उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि आईएनएस माहे के बेड़े में शामिल होने के बाद जनरल द्विवेदी ने उन नौसेना कर्मियों को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया, जिन्होंने जहाज के जलावतरण में प्रमुख भूमिका निभाई थी। अधिकारी ने कहा कि यह एक असाधारण घटना है लेकिन आने वाले समय में तीनों सेनाओं के बीच बढ़ रहे तालमेल के साथ यह अधिक सामान्य होती जाएगी। भारतीय नौसेना पड़ोसी क्षेत्रों के साथ-साथ वैश्विक परिवेश में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जहां सेना के प्रयास सॉफ्ट और हार्ड कूटनीति दोनों में सहायक और पूरक भूमिका निभा सकते हैं। जनरल द्विवेदी ने इसे बुद्धिमत्तापूर्ण कूटनीति हैं।

देश की तटीय सुरक्षा और मजबूत करेगा आईएनएस माहे

मुंबई भारतीय नौसेना ने सोमवार को आईएनएस माहे को अपने बेड़े में शामिल कर लिया। यह माहे श्रेणी का पहला पनडुब्बी रोधी उथले पानी का युद्धपोत है। यह पोत बड़े युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसेना के हवाई बेड़े के साथ तालमेल बनाकर काम करेगा। इससे तटीय सुरक्षा की पहली पंक्ति और मजबूत होगी। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी आईएनएस माहे के जलावतरण के अवसर पर मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा, आईएनएस माहे का शामिल होना भारत की स्वदेशी पोत निर्माण क्षमता का मजबूत प्रमाण है। यह दिखाता है कि भारत जटिल तकनीक वाले युद्धपोतों को खुद डिजाइन, तैयार और संचालित करने में सक्षम है।

सशस्त्र बलों की ताकत तालमेल में निहित

जनरल द्विवेदी सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस अवसर पर कहा, सशस्त्र बलों की ताकत तालमेल में निहित है और ऑपरेशन सिंदूर इसका उपयुक्त उदाहरण है। आज के युग में समुद्र की गहराई से लेकर ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों तक एक साथ मिलकर कार्य करने की सेनाओं की क्षमता देश की सुरक्षा को निर्धारित करेगी। समारोह के बाद जनरल द्विवेदी ने आईएनएस माहे के निर्माण में भूमिका निभाने वाले कर्मियों को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन भी प्रदान किया।

छोटा पर घातक

नौसेना के अनुसार, आईएनएस माहे छोटा पर शक्तिशाली युद्धपोत है। यह बिना शोर के गश्त कर सकता है, जिससे दुश्मन पोत या पनडुब्बी को इसका पता नहीं चल पाता। नौसेना के अनुसार, आईएनएस माहे के शामिल होने से निकट समुद्री क्षेत्रों पर पकड़ मजबूत होगी, तटीय सुरक्षा सुदृढ़ होगी और भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा क्षमताओं में बड़ा इजाफा होगा। लंबाई : लगभग 50-55 मीटर चौड़ाई : लगभग 10-12 मीटर गति : 45-46 किलोमीटर प्रति घंटा मुख्य खासियत 1. उथले पानी में ऑपरेशन : जहां बड़े पोत नहीं जा सकते, वहां भी आसानी से चल सकता है। 2. पनडुब्बी खोजने की क्षमता : उन्नत सोनार और सेंसर से पानी के भीतर मौजूद खतरे को पकड़ लेता है। 3. स्टील्थ डिजाइन : चलने की आवाज कम, ताकि पनडुब्बियां इसे पकड़ न सकें। 4. फायरपावर : टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन रॉकेट से हमले की क्षमता।

स्वदेशी तकनीक से निर्माण

आईएनएस माहे को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने तैयार किया है। यह माहे श्रेणी के आठ पोतों में पहला है। पोत का निर्माण पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसमें 80 प्रतिशत से अधिक भारतीय सामग्री का उपयोग हुआ है। साइलेंट किलर इस युद्धपोत का नामकरण मालाबार तट स्थित ऐतिहासिक तटीय शहर माहे के नाम पर किया गया है। युद्धपोत के प्रतीक चिह्न में ‘उरुमी’ को दर्शाया गया है जो कलारीपयट्टू की लचीली तलवार है और यह फुर्ती, सटीकता और घातक कौशल का प्रतीक मानी जाती है। पोत का आदर्श वाक्य ‘साइलेंट हंटर’ है, जो उसकी स्टील्थ क्षमता को दर्शाता है।

लाचित बरफुकन का जीवन देशभक्तों के लिए प्रेरणास्त्रोत : अमित शाह

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को अहोम सेनापति लाचित बरफुकन की जयंती पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनका जीवन हमेशा देशभक्ती की प्रेरणा देते रहेगा। अहोम सेनापति लाचित बरफुकन को सरायघाट की लड़ाई के लिए जाना जाता है, जो वर्तमान गुवाहाटी के पास ब्रह्मपुत्र के तट पर लड़ी गई थी और मुगलों के खिलाफ असम की सबसे निर्णायक लड़ाई में से एक थी। अमित शाह ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि हमारे इतिहास के महानतम योद्धाओं में से एक अहोम सेनापति लाचित बरफुकन की अटूट देशभक्ति, अजेय वीरता और अद्वितीय सैन्य नेतृत्व ने न केवल असम और हमारे पूर्वोत्तर के शेष क्षेत्र को मुगलों के आक्रमण से बचाया, बल्कि इस क्षेत्र की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखा। उनका जीवन देशभक्तों के लिए सदैव प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा।

गोवा: ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसे यात्री की बचाई जान

पणजी रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की सतर्कता से दक्षिण गोवा के मडगांव रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा हादसा टल गया। स्टेशन से रवाना हो रही ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंसे एक यात्री को समय रहते बचा लिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि रविवार शाम करीब सात बजे मडगांव–मुंबई मत्स्यगंधा एक्सप्रेस स्टेशन से निकल रही थी। तभी महाराष्ट्र के धाराशिव निवासी 66 वर्षीय गणेश लिमराज चलती ट्रेन के जनरल डिब्बे से कूदने की कोशिश में प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंस गए। यह देखते ही हेड कांस्टेबल आर एस भाई और कांस्टेबल कपिल सैनी तुरंत दौड़ और यात्री को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना में यात्री को कोई चोट नहीं आई।

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