Delhi High Court Decision 2026 दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली में कृषि से होने वाली आय पर टैक्स लगाने की मांग
नई दिल्ली: Delhi High Court Decision 2026 दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली में कृषि से होने वाली आय पर टैक्स लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कोर्ट टैक्स नीति के मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है और ये सरकार का नीतिगत मामला है।
Delhi High Court Decision 2026 कोर्ट ने कहा कि वो न्यायिक आदेश के जरिये सरकार को ये नहीं कह सकती
कोर्ट ने कहा कि वो न्यायिक आदेश के जरिये सरकार को ये नहीं कह सकती है कि वो टैक्स पर किस किस्म का कानून बनाए, ये काम विधायिका का है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई बार याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या कोर्ट इस तरह का आदेश पारित कर सकती है कि सरकार कानून बनाए।
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Delhi High Court Decision 2026 याचिकाकर्ता की ओर से वकील कुमार उत्कर्ष ने कहा कि कृषि से होने वाली आय पर टैक्स भरने से छूट
याचिका आकाश गोयल ने दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से वकील कुमार उत्कर्ष ने कहा कि कृषि से होने वाली आय पर टैक्स भरने से छूट मिलती है जबकि कई लोगों की कृषि से होने वाली आय काफी ज्यादा होती है। ऐसा करने से वित्तीय असमानता पैदा होती है। याचिका में कहा गया था कि कृषि और गैर-कृषि आय का वर्गीकरण मनमाने तरीके से किया गया है।
Delhi High Court Decision 2026 याचिका में कहा गया था कि सैलरी पाने वाले कर्मचारियों, व्यापारी और प्रोफेशनल्स टैक्स भरते
याचिका में कहा गया था कि सैलरी पाने वाले कर्मचारियों, व्यापारी और प्रोफेशनल्स टैक्स भरते हैं लेकिन महज कृषि आय घोषित कर देने से बड़ी आय वालों को भी टैक्स भरने से छूट मिल जाती है। याचिका में कहा गया था कि ऐसा संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 265 का उल्लंघन है। टैक्स में ऐसी छूट पक्षपातपूर्ण वर्गीकरण है और टैक्स भरने वालों के साथ पक्षपात है।
Delhi High Court Decision 2026: अदालत ने सुनवाई से किया इनकार
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि बड़े किसानों और करोड़ों रुपये की कृषि आय अर्जित करने वाले लोगों पर टैक्स लगाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाएं। याचिका में दावा किया गया था कि कुछ लोग कृषि आय के नाम पर टैक्स छूट का गलत फायदा उठा रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है।
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि टैक्स नीति तय करना न्यायपालिका का नहीं बल्कि सरकार और संसद का काम है। अदालत ने कहा कि संविधान में कृषि आय को लेकर स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं और इस संबंध में कोई भी बदलाव संसद द्वारा ही किया जा सकता है।
Delhi High Court Decision 2026 कृषि आय पर टैक्स को लेकर लंबे समय से जारी है बहस
भारत में कृषि आय पर कर नहीं लगाया जाता, क्योंकि इसे किसानों की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए जरूरी माना गया है। हालांकि, समय-समय पर यह बहस उठती रही है कि बड़े और संपन्न किसानों को टैक्स के दायरे में लाया जाना चाहिए।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और सीमांत किसानों को टैक्स से बाहर रखना जरूरी है, लेकिन करोड़ों रुपये की कृषि आय दिखाने वाले लोगों की जांच होनी चाहिए। कई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि कुछ लोग काले धन को सफेद करने के लिए कृषि आय का इस्तेमाल करते हैं।
Delhi High Court Decision 2026 सरकार और नीति आयोग पहले भी दे चुके हैं संकेत
पिछले कुछ वर्षों में कई आर्थिक विशेषज्ञ और नीति आयोग से जुड़े अधिकारियों ने सुझाव दिया था कि बड़े कृषि कारोबार और अत्यधिक कृषि आय वालों पर सीमित कर लगाने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है।
केंद्र सरकार का कहना रहा है कि देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और कृषि क्षेत्र पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में कृषि आय पर टैक्स लगाने का फैसला किसानों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
Delhi High Court Decision 2026 किसानों के संगठनों ने जताई नाराजगी
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका की खबर सामने आने के बाद कई किसान संगठनों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि खेती पहले ही घाटे का सौदा बनती जा रही है और ऐसे में कृषि आय पर टैक्स लगाने की मांग किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है।
किसान नेताओं ने कहा कि सरकार को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि लागत कम करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि टैक्स लगाने जैसे मुद्दों को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अधिकांश किसान छोटे और मध्यम वर्ग से आते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है।
Delhi High Court Decision 2026 आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल कृषि आय पर टैक्स लगाने की संभावना कम दिखाई देती है, लेकिन भविष्य में बड़े कृषि कारोबारों को लेकर अलग नियम बनाए जा सकते हैं। अदालत के फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस विषय पर अंतिम निर्णय सरकार और संसद के स्तर पर ही लिया जाएगा। फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले ने राजनीतिक और आर्थिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर बहस और तेज हो सकती है।
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