Rahul Gandhi Defamation Case: राहुल गांधी को मानहानि मामले में नोटिस तामील, अब 19 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

Rahul Gandhi Defamation Case

हाथरस: बूलगढ़ी कांड से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi Defamation Case) को अदालत का नोटिस तामील हो गया है। मंगलवार को एडीजे पंचम विजय कुमार द्वितीय की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। नोटिस की तामील की जानकारी अदालत को दिए जाने के बाद न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 19 सितंबर की तारीख तय की है। मानहानि परिवाद दाखिल करने वाले रामकुमार समेत अन्य युवकों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने नोटिस तामील होने की पुष्टि की है। यह मामला वर्ष 2020 में सामने आए बूलगढ़ी कांड से जुड़ा है, जिसने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी चर्चा बटोरी थी।

क्या है बूलगढ़ी कांड? (Rahul Gandhi Defamation Case)

हाथरस (Rahul Gandhi Defamation Case) के चंदपा क्षेत्र के गांव बूलगढ़ी में 14 सितंबर 2020 को अनुसूचित जाति की एक युवती पर हमले का मामला सामने आया था। शुरुआती शिकायत में गांव के संदीप के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में युवती के बयानों के आधार पर रवि, रामकुमार और लवकुश के नाम भी मामले में शामिल किए गए। युवती की हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 29 सितंबर 2020 को उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया था।

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सीबीआई ने मामले की जांच के बाद एससी-एसटी एक्ट की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने रवि, रामकुमार और लवकुश को बरी कर दिया, जबकि संदीप को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 और एससी-एसटी एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

राहुल गांधी के खिलाफ क्यों दायर हुआ मानहानि का मामला?

बरी किए गए रामकुमार, रवि और लवकुश की ओर से राहुल गांधी (Rahul Gandhi Defamation Case) के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि 12 दिसंबर 2024 को बूलगढ़ी गांव के दौरे के दौरान राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी की, जिससे उन्हें गैंगरेप के आरोपी के रूप में पेश किए जाने का आरोप लगाया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अदालत उन्हें पहले ही मामले से बरी कर चुकी थी। इसी आधार पर उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई की मांग की।

एमपी-एमएलए कोर्ट ने पहले खारिज कर दिया था मामला

राहुल गांधी की ओर से लखनऊ के अधिवक्ता आलोक चंद्रा ने अदालत में आपत्ति दाखिल की थी। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi Defamation Case) ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर लोकहित से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 105(2) के तहत प्राप्त संसदीय विशेषाधिकार का भी हवाला दिया गया था। बचाव पक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े वैधानिक प्रमाणपत्र और अभियोजन की अनुमति समेत कई अन्य कानूनी बिंदु भी उठाए थे।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट ने 14 मई को मानहानि वाद खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि राहुल गांधी (Rahul Gandhi Defamation Case) के कथन का आशय सरकार की घोषणाओं और नीतियों की आलोचना या टिप्पणी करना था। अदालत के मुताबिक उपलब्ध साक्ष्यों और धारा 225 बीएनएस के तहत प्रस्तुत रिपोर्ट के परीक्षण में किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।

जिला न्यायालय में दाखिल हुई रिवीजन याचिका

विशेष न्यायाधीश के इस आदेश के खिलाफ रामकुमार की ओर से जिला न्यायालय में रिवीजन याचिका दाखिल की गई। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi Defamation Case) को नोटिस जारी किया था। रामकुमार के अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर के मुताबिक, नोटिस की तामील की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। मंगलवार को अदालत में इसकी जानकारी रखी गई।

अब इस मामले में अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी। फिलहाल अदालत में होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। रिवीजन याचिका में विशेष न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल मानहानि वाद को खारिज किया गया था।

 

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