Story 2026 चोर की एक गलती और कोतवाल के बेटे का दिमाग: जानिए कैसे खुली पोल The Clever Thief Story
The Clever Thief Story पहली बार इस website पर आए हैं तो website को सब्सक्राइब कर लीजिए तो Post अच्छी लगे तो कमेंट और लाइक करना बिल्कुलनाआप उसे समय की है जब रामधन नाम का एक किसान एक छोटे से गांव में रहता था उसका छोटा सा परिवार था जिसमें उसकी पत्नी और उसका इकलौता बेटा चंदन थावह खेती किसानी करके अपने घर का गुजारा चलता था रामधन बहुत अमीर तो नहीं था एक ही भगवान की दया से उसके घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थीअपने जीवन में उसे कोई दुख नहीं था शिवाय एक परेशानी के और वह परेशानी थी उसका बेटा चंदनजो की बहुत ही आवारा और निखट्टू किस्म का था हालांकि अब वह नौजवान बन चुका था लेकिन बचपन से ही वह पूरी संगति में रहने के कारण अपने मां-बाप के लिए एक मुसीबत बनता जा रहा था जब वह छोटा था तभी से गांव वाले इसकी शिकायतें लेकर आते रहते थे कभी वह किसी की मुर्गी चुरा लेता तो कभी किसी की बकरी खोल देता गांव के लोगों के शिकायतों से और अपने बेटे की इन हरकतों से रामधन बहुत ही परेशान हो चुका था वह अक्सर अपने बेटे को समझता कि बेटा मेरा ख्याल है कि तू एक तेज दिमाग वाला लड़का हैलेकिन अगर तू अपना दिमाग इन उल्टे सीधे कामों में न लगाकर सही जगह पर लगे तो एक दिन बहुत कामयाब इंसान बन सकता है परंतु चंदन पर अपने पिता की इन बातों का कोई असर नहीं होता था एक बात तो थी चंदन सचमुच एक तेज दिमाग वाला लड़का था क्योंकि आज तक उसने जितनी भी चोरी चकारी की हरकतें की थी उनमें वह कभी भी पकड़ नहीं गया थाकिसान अक्सर अपनी पत्नी से कहता भाग्यवान तुम अपने बेटे को समझती क्यों नहीं वह इन हरकतों से बात आए वरना एक दिन ऐसा आएगा जब हमें उसके कारण इस गांव से निकाल दिया जाएगा उसकी पत्नी कहती अरे यह सब गांव वाले मेरे बेटे से जानते हैं आखिर वह ऐसा करता ही क्या है उसकी छोटी-मोटी श्रपों को यह गांव वाले बड़ा चढ़कर तुम्हें बताते हैंजरा उनके खुद के बच्चों को तो देखो वह कौन सा दूध के धुले हैं इस तरह से चंदन की मां हर बार अपने बेटे का मजाक कर दी लेकिन चंदन अपने हरकतों से बाज नहीं आ रहा था आप चंदन नौजवान हो चुकाथा तो एक दिन जब चंदन अपने पड़ोस के गांव में घूम रहा था कि तभी उसकी नजर एक घर पर पड़ी उसे घर के बाहर खड़ा हो गया उसने देखा कि घर के अंदर एक बूढ़ा आदमी हाथ में छड़ी लिए हुए चीजों को इधर-उधर टटोलत हुआ चल रहा थाइससे यह बात साफ हो गई कि वह पूरा एक अंधा है चंदन ने अपने जूते उतारे और चुपचाप उसे घर के अंदर दाखिल हो गया अंदर जाकर वह घर का मुआयना करने लगा उसने देखा कि घर के अंदर काफी कीमती सामान पड़ा हुआ था वह सोचने लगा कि अगर मैं इस सामान को किसी तरह से उड़ा लूं तो इतनी रकम इकट्ठी कर लूंगा कि दो-तीन साल तक मुझे कहीं चोरी नहीं करनी पड़ेगीवह जिस तरह से दबे पांव आया था उसी तरह दबे पांव वापस घर से निकल गया अब क्योंकि दोपहर का समय था इसलिए किसी ने भी उसे आते जाते नहीं देखा वह वापस अपने गांवकी तरफ
तू इतनी रकम इकट्ठी कर लूंगा की 2 दिन साल तक मुझे कहीं चोरी नहीं करनी पड़ेगी वह जिस तरह से दबे पांव आया था उसी तरह दबे पांव वापस घर से निकल गया अब क्योंकि दोपहर का समय था इसलिए किसी ने भी उसे आते जाते नहीं देखा वह वापस अपने गांव की तरफ चल दिया चलते-चलते सोच रहा था कि वह इतना सारा मालआपके घर से नहीं निकल सकताउसे इस काम के लिए किसी और की भी सहायता लेनी पड़ेगी ताकि ज्यादा से ज्यादा माल चुराया जा सके सोचते सोचते उसका ध्यान उसके दोस्तों की तरफ गया जो इस की तरह आवारा थी चंदन इस समय अपने कुछ आवारा दोस्तों के पास गया और उनसे कहने लगा भाइयों आखिर कब तक हम यूं ही छोटी मोटी चोरियां करके अपना समय खराब करते रहेंगेक्यों ना कोई ऐसी चोरी की जाए जिसमें बड़ा माल हाथ लगी और कई दिनों तक हमारा आशु आरंभ चला रहे उसके दोस्त कहने लगे अरे चंदन तेरा दिमाग तो खराब नहीं हो गया पहले ही गांव वालों की नजरों में हमारी कोई इज्जत नहीं है अगर अब तेरी बातों में जाकर हमने कोई ऐसी वैसी हरकत कर दी तो पकड़े जाने पर गांव वाले सीधा कोतवाल के कारागार में डलवा देंगेचंदन बोल अरे मूर्खो तुम पहले मेरी योजना तो सुनो यह चोरी अपने गांव में नहीं बल्कि आज पड़ोस के गांव में करेंगे और किसी ऐसे घर में करेंगे जहां पर हमारे पकड़े जाने की कोई गुंजाइश नहीं होगी और मैं तो एक ऐसा घर ढूंढ भी लिया है बस तुम लोग अगर मेरा साथ दो तो हम मालामाल हो जाएंगेलेकिन फिर भी चंदन के दोस्तों ने कहा चंदू तेरी बातों में आकर हम ऐसी वैसी कोई भी हरकत नहीं करने वाले चंदन ने कहा देखो भाइयों तुम्हें डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि चोरी का सारा काम तो मैं करूंगा तुम्हें तो सिर्फ चोरी का सामान उठाने में मेरी सहायता करनी है पहले मेरी पूरी योजना तो सुन लो मैं पड़ोस के गांव में एक ऐसा घर देखा है जिसमें एक बड़ा आदमी रहता है और वह बिल्कुल अकेला है सबसे बड़ी बात तो यह है कि वह आंखों से अंधा भी हैअगर वह हमारे चोरी करने के दौरान उठ भी गया तो हमें देख नहीं पाएगा एक ऐसा घर जिसमें अकेला अंधा बूढ़ा आदमी रहता हैयह सुनकर भी उसके दोस्त इस काम के लिए नहीं मान रहे थे तो चंदू कहने लगा अरे तुम लोग किसी सामान को हाथ मत लगाना सारा सामान मैं इकट्ठा करूंगा और एक घोड़े में मार दूंगा बस तुम लोग उसे सारे सामान को बाहर लाने में मेरी सहायता करना मैं तुम्हें इसके बदले में इतना इनाम दूंगा कि तुम सोच भी नहीं सकते वहां पर चोरी करने से ज्यादा आसान कोई और काम नहीं हैऔर फिर सारा काम तो मैं ही करूंगा तुम्हें तो सिर्फ सामान उठाने में मेरी सहायता करनी है क्योंकि हमें रात के समय चोरी करनी है तो तुम शाम को मेला देखने के बहाने अपने-अपने घरों से निकल आना इस तरह से चंदन ने पहले पुतला कर अपने दोस्तों को अपने साथ शामिल कर लिया और फिर शाम के समय चंदन के दौर मेला देखने के बहाने से अपने-अपने घरों से निकले और फिर वह दोनों गांव के बाहर एक बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचेजहां पर चंदन पहले से ही उनका इंतजार कर रहा था. बच्चों को इकट्ठा कर लियाबूढ़े आदमी की आवाज सुनकर जल्दी ही उसके घर में मजमा लग गया लोगों ने उन तीनों चोरों को पकड़ा और आंगन में ही एक पेड़ के साथ बांध दिया सुबह उन तीनों को कोतवाल के सामने पेश किया गया चंदन के बाकी दोनों दोस्त चंदन से कहने लगेकि हम तुम्हारी वजह से इस मुसीबत में फंसे हैंना हम तुम्हारा साथ देते और ना हम यहां पर पहुंचे माल के सामने साफ-साफ मुकर जायेंगे कि हमारा चोरी का कोई इरादा नहीं था असली अपराधी तो तुम हो चंदन उन दोनों से कहने लगा नहीं नहीं तुम मेरी बात सुनोहम सब ने कोतवाल के सामने यह बिल्कुल भी नहीं मानना की असली चोर कौन है इस तरह से जब कोतवाली फैसला नहीं कर पाएगा की असली अपराधी कौन है तो फिर हम सजा पाने से बच जाएंगेअगले दिन उन दिनों चोरों को कोतवाल के सामने पेश किया गया और फिर वह बूढ़ा आदमी कोतवाल से कहने लगा कोतवाल साहब मैं अंधा हूं और मेरा एक बेटा है जो व्यापार के लिए दूसरे शहर में गया हुआ है मैं घर पर अकेला था और मुझे अकेला पाकर यह तीनों मेरे घर में घुसे लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था और मैं इन तीनों को रंगे हाथों पकड़ लिया उसे कमरे में बंद कर दिया अब मेरी आपसे गुजारिश है कि आप इन तीनों को ऐसी सजा दीजिए ताकि आइंदा कोई भी आदमी चोरी करने से पहले हजार बार सोचऔर फिर कोतवाल तीनों चोरों से कहता है कि तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है इस पर हर एक दोस्त ने यही कहा कि मैं कर नहीं हूं मैं तो सिर्फ इन दोनों के कहने पर इनका साथ देने के लिए आया था इस तरह से तीनों दोस्त एक दूसरे को अपराधी बता रहे थे कोतवाल को यह फैसला करना मुश्किल हो गया की 80 अपराधी कौन है जिस पर उसे बूढ़े आदमी ने कहा कोतवाल साहब आप मेरी मां ने और इन तीनों को ही कारागार में डालकर सजा दीजिएतब कोतवाल बोला नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता इन तीनों में से कोई भी यह बात नहीं मान रहा की असली अपराधी कौन है हर कोई एक दूसरे पर इल्जाम लगा रहा है इसलिए मुझे तो उनके अपराधों के हिसाब से इन्हें सजा देनी होगी क्योंकि जो असली चोर है जिसने यह सब योजना बनाई के लिए दंड अलग होगा जबकि उसका साथ देने वाले चोरों के लिए सजा कुछ और होगीउसके बाद को त्यौहार में उन दोनों दोस्तों को धमकाते हुए कहा कि तुम में से जो भी असली चोर है वह अपना अपराध स्वीकार कर ले वरना अच्छा नहीं होगा कोतवाल ने उन्हें मनाने की हर कोशिशकी थी वह तीनों तो जो के दोहे बने रहे अब कोतवाल को समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे इन तीनों को सजा देऔर फिर कुछ सोच कर कोतवाल ने उन तीनों की परीक्षा लेना तय किया उसने तीनों से पूछा तुम्हें भूख लगी होगी क्या तुम कुछ खाना चाहते हो और फिर तीनों के लिए खाने की चीज मंगवाई गई सबसे पहले चंदन की बारी थी उसे खाने के लिए चैन पेश किए गए मगर उसने चने खाने से इनकार कर दिया और कहने लगा कि यह चैन पहले किसी घोड़े ने खाए हैं और उसके बच्चे हुए चने मुझे दिए गए हैं कोतवाल ने हैरानी से अपने बावर्ची की तरफ देखाबावर्ची कहने लगा हजूर शायद सच कह रहा है कल जब मैं आपके घोड़े को चैन दिए थे तो मैंने वह थैला लाकर रसोई घर में रख दिया था और उधर एक दूसरा फैला भी पड़ा था मैं यह भूल गया की घोड़े के सामने कौन सा थैला रखाथा शायद जाने मैं इस थैली में से निकाल कर लाया हूं जो घोड़े ने खाए थेयह सुनकर को तोहार सच में पड़ गया के बाद दूसरा दोस्त जिसका नाम सज्जन था उसे दूध पीने के लिए दिया गया वह दूध पीने से पहले उसे सुनने लगा और कहने लगा मैं यह दूध नहीं पी सकता कोतवाल ने कहा आखिर इसकी क्या वजह है सज्जन बोला यह दूध जहरीला है इसमें जहर मिलाया गया है इसलिए मैसेज नहीं पी सकता कोतवाल ने एक बार फिर से अपने बावर्ची की तरफ देखा और उसे दूध की जांच करने के लिए कहा बावर्ची ने एक दूसरे बर्तन में दूध को उड़ेलातो उसके अंदर एक मरी हुई छिपकली पड़ी थी जिसे देखकर सब लोग हैरान रह गए अब तीसरे दोस्त के बड़ी थीउसे मांसाहार पसंद था इसलिए उसे खाने के लिए मांस पेश किया गया जैसे ही उसने मांस का एक निराला उठाया तो कहने लगा यह कुत्ते का मांस है कोतवाल नहीं अपने बावर्ची से पूछा क्या सचमुच यह कुत्ते का मांस है बावर्ची ने कहा नहीं मालिक यह कुत्ते का मांस नहीं है आप चाहे तो पता करवा ले कोतवाल ने फौरन उसे कसाई को बुलवाया इसके दुकान से वह मांस लाया गया थाबने कसाई से गुस्से में पूछा क्या तुम्हारी दुकान पर कुत्ते का मांस बिकता है तुम्हें इसकी सजा मिलेगी यह सुनकर कसाई डर गया और कहने लगा कोतवाल साहब यह बकरा ही था असल में जब यह बकरा पैदा हुआ था तो इसकी मां मर गई थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं अब इसे कैसे पा लूंगा एक दिन यह बकरा खुद ही एक कुत्तिया का दूध पीने लगा यह देखकर मैं हैरान रह गया और फिर वह बकरा रोज इस कुटिया का दूध पीने लगा उसे कुत्तिया का दूध पीकर ही वह जवान हुआ इसके कुछ हरकतें कुत्तों जैसी भी थीशायद यही वजह है कि इसके मन से कुत्ते की बदबू आ रही है कोटद्वार यह सुनकर हैरान रह गया अब तो कोतवाल सच में पड़ गया कि यह तीनों तो बहुत ही अकलमंद है इनमें से असली चोर को पकड़ना बाद ही मुश्किल काम है कोतवाल ने उसे रात उन तीनों को कारागार में डलवा दिया और अपने घर पहुंचा और सच में पड़ गया कि आखिरकार किस तरह से उनमें से असली चोर को पकड़ा जाए कोतवाल का बेटा जो वहीं पर बैठा हुआ था अपने पिता को परेशानी में डूबा हुआ देखकर ने लगा पिताजी आखिर आप किसी परेशानी हैअपने बेटे के पूछने पर कोतवाल ने अपने बेटे को उन तीन चोर दोस्तों की सारी बात सुनती अपने पिता की बातें सुनकर कोतवाल का बेटा कहने लगा पिताजी आप एक मौका मुझे दीजिए हो सकता है कि मैं आपको असली जोर का पता लगाने में सहायता कर सकूं कोतवाल कहने लगा बेटा तुम भला असली चोर को कैसे पकड़ पाओगेमैं इतने सालों से यह काम कर रहा हूं जब मुझे असली चोर का नहीं पता लगा तो तुम भला यह काम कैसे कर लोगे बेटा कहने लगा पिताजी जीवन में कई बार ऐसा होता है की बड़ी-बड़ी समस्याओं का हाल हमें वहां से मिल जाता है जहां से हमें कोई उम्मीद ना हो कोतवाल को अपने बेटे की बात सही लगी और उसने कहा ठीक है बेटा तो कल तुम मेरे साथ कचहरी चलना मैं तुम्हें भी आजमा कर देख लेता हूं अगले दिन कचहरी में कोतवाल के बेटे के सामने उन तीनों कर दोस्तों को पेश किया गया कोतवाल का बेटा कहने लगा देखो भाइयों तुम तीनों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं हैमैं तो यहां पर तुम तीनों को एक कहानी सुनाने के लिए आया हूंयह बात सुनकर वहां पर मौजूद सभी लोग हैरान थे कि कोतवाल का बेटा यहां पर चोर पकड़ने आया है या फिर कोई किस कहानी सुनाने के लिए और फिर कोतवाल के बेटे ने अपनी कहानी सुनना शुरू की वह कहने लगा किसी नगर में एक लड़की अपने पति के साथ रहती थीएक दिन उसे चिट्ठी मिली जिसमें लिखा था कि उसका पिता बहुत ही ज्यादा बीमार है और उसे इलाज के लिए पैसों की आवश्यकता है लड़की के पास तो कोई पैसे थी नहीं तो उसने अपने पति से कहा कि मेरे पापा बहुतबीमार और मुझे उनके इलाज के लिए पैसों की आवश्यकता हैउसके पति के पास भी उसे समय पैसे नहीं थेलेकिन उसने अपनी भैंस भेज कर पैसे इकट्ठे किए और अपनी पत्नी को दे दिए और उसे पिता के घर की तरफ रवाना कर दिया रास्ते में उसे लड़की को एक बेईमान आदमी ने देख लिया और लड़की को अकेला पाकर उसने लड़की का रास्ता रोक लिया लेकिन वह लड़की कहने लगी भगवान के लिए मुझे जाने दीजिए मैं तो तुम्हारी बहन की तरह हूं लड़की की हालत देखकर उसे आदमी के मन में दया आ गई और उसने लड़की को जाने दियालड़की ने उसका धन्यवाद किया और आगे चल पड़ी वह थोड़ी ही डर गई थी कि उसे चोरों ने घेर लिया और लड़की से कहने लगे कि तुम्हारे पास जो कुछ भी है वह हमें दे दो अगर तुम ऐसा नहीं करोगे तो हम तुम्हें यहीं पर मार देंगे लड़की कहने लगी कि मेरे पास जो भी पैसे हैं वह मैं अपने पापा के इलाज के लिए लेकर जा रही हूं अगर तुमने मुझसे वह पैसे ले लिए तुम मेरे पापा मर जाएंगेभगवान के लिए मुझे जाने दो जोड़ों के सरदार के दिल में उसे लड़की के लिए दया आ गई उसने लड़की को जाने दिया अब वह लड़की शहर पहुंची उसने अपने पापा का इलाज करवाया और उसका पिता बिल्कुल भला चंदा हो गया कोतवाल के बेटे ने कहा यह कहानी यहीं पर खत्म हो जाती है और उसने उन तीनों दोस्तों से सवाल किया कि तुम मुझे यह बताओ इस लड़की पर सबसे बड़ा उपकार किसने किया सबसे पहले उसने गुल्लू से पूछा तो वह कहने लगा कि उसे लड़की के पतिक्योंकि उसने अपनी भैंस बेचकर उसे पैसे न दिए होते तो लड़की के पापा का कभी भी इलाज ना हो पता आपके द्वारा का बेटा दूसरे दोस्त यानी सज्जन के पास गया और कहने लगा तुम बताओ की लड़की पर सबसे बड़ा उपकार किसने किया है वह बोला लड़की पर सबसे बड़ा उपकार उसे बेईमान आदमी ने किया जिसने उसे अकेला पाकर भी उसे कुछ नहीं किया और उसे जाने दिया क्योंकि एक लड़की की इज्जत उसकी जान से भी ज्यादा प्यारी होती हैउसके बाद कोतवाल का बेटा तीसरे दोस्तचंदन के
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लड़की की इज्जत उसकी जान से भी ज्यादा प्यारी होती है
उसकी जान से भी ज्यादा प्यारी होती है इसके बाद कोतवाल का बेटा तीसरे दोस्त चंदन के पास गया और कहने लगा तुम बताओ चंदन बोला कि उसे लड़की पर सबसे बड़ा एहसान उसे जोड़ने किया हैक्योंकि अगर वह लड़की से सारा माल छीन लेते तो वह अपने बाबा का इलाज कभी बिनासबसे बड़ा एहसान को चोरों ने उसे पर कियाथा पर कोतवाल के बेटे ने अपने पिता से कहा कि यही आदमी असली अपराधी है कोतवाल हैरान रह गया और अपने बेटे से पूछने लगा कि तुम्हें कैसे पता चला कि यह अपराधी हैइस पर उसके बेटे ने जवाब दिया कि इंसान के अंदर जिस तरह की आदतें होती हैं उसको उसी तरह के लोग पसंद आते हैं आप क्योंकि यह असली चोर है इसीलिए इसने भी एक जोर की अच्छाई को ही पसंद किया और उसकी तारीफकि इसके बाद कोतवाल ने अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि चंदन को ले जाकर इससे पूछताछ की जाए जनतंत्र तो पहले से ही चोर साबित हो चुका था थोड़ी सी शक्ति करने पर उसने अपना अपराध स्वीकार कर लियायह साबित हो गया कि चंदन ही असली चोर है और उसके बाकी दोनों दोस्त चोरी का माल ले जाने में उसके सहायक थे और फिर कोतवाल ने चंदन को 10 साल के लिए कारगर मिटा दिया और उसके बाकी दोनों साथियों को तड़ीपार कर दिया गया और उन्हें नगर से बाहर निकाल दिया गया यह खबर चंदन के गांव पहुंची तो तीनों दोस्तों के मां-बाप कचहरी मेंआकर अपने अपने बच्चों के लिए दया की भीख मांगने लगेलेकिन तब तक बहुत देर होचुकी है उनकी सभी कोशिश इतना काम नहीं तो दोस्तों यह कहानी हमें सिखाती है की बुराई करने के साथ-साथ बुराई का साथ देने वाले भी अपराधी होते हैं जो आदमी अपराधी का पता होते हुएभी रह जाता है तो वह न्याय के रास्ते में रुकावट बन जाता है और इस तरह से वह भी अपराध में शामिल हो जाता है और यह भी सच है की बुराई को सहारा देने वाला भी पूरे अंजाम से नहीं बन सकता बुराई का साथ देने वाले को शायद उसे समय कोई नुकसान ना हो लेकिन एक न एक दिन वह भी पकड़ा जाता है अगर सभी लोग अन्य और अपराध के खिलाफ आवाजउठाएं तो यह दुनिया स्वर्ग बन जाएगी लेकिन अगर कोई बुराई को देखते हुए भी अपनी आंखें बंद कर ले तो एक न एक दिन वह भी आएगा जब वह खुद उसे बुराई का शिकार बन जाएगा यह कहानी सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में भी ऐसे वाक्य होते रहते हैं जब चंदन जैसे शामिल अपराधी अपने आसपास के लोगों को पहले कुशवाहा कर अपने अपराध में शामिलकरने की कोई कहानी बहुत ही पसंद आई होगी.
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