NGT Decisions: देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने 22 अगस्त को अपने फैसले में कहा कि हालांकि कंपनी से पर्यावरणीय उल्लंघन हुए हैं, लेकिन उसके वार्षिक टर्नओवर के आधार पर लगाया गया जुर्माना कानूनी आधार के अनुकूल नहीं है। शीर्ष अदालत ने पर्यावरण मानदंडों के कथित उल्लंघन के लिए मुरादाबाद स्थित हस्तशिल्प निर्यातक सीएल गुप्ता एक्सपोर्ट लिमिटेड पर जुर्माना लगाने वाले एनजीटी के 145 पन्नों के फैसले की भी आलोचना की। अदालत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विवेक का इस्तेमाल उपयोग में लाए गए पन्नों की संख्या के अनुपात में नहीं है।
पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन NGT Decisions
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित एक हस्तशिल्प निर्यातक पर 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा है कि कानून का शासन राज्य या उसकी एजेंसियों को पर्यावरण मामलों में ‘एक दमड़ी भी’ वसूलने की अनुमति नहीं देता है। शीर्ष न्यायालय ने निर्यातक के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को धन शोधन के मामले (पीएमएलए) में जांच का आदेश देने वाले फैसले को भी निरस्त कर दिया और कहा कि यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
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न्यायिक निर्णय की मूल आत्मा विवेकपूर्ण विचार NGT Decisions
फैसले में आगे कहा गया कि न्यायिक निर्णय की मूल आत्मा विवेकपूर्ण विचार है, और अदालतों व अधिकरणों को केवल सामान्य रूप से कानून का उल्लेख करने वाले भाषणात्मक रुख अपनाने से बचना चाहिए, खासकर जब वह तथ्यों के संदर्भ के बिना हो। पीठ ने कहा, हम इससे अधिक कुछ नहीं कहेंगे तथा एनजीटी के आदेश को ऊपर उल्लेखित सीमा तक निरस्त करने वाली अपील को स्वीकार करते हैं।
एक फैसले का हवाला दिया NGT Decisions
पीठ ने वार्षिक कारोबार के आधार पर जुर्माना लगाने के सवाल पर चर्चा करते हुए एक फैसले का हवाला दिया। एनजीटी ने उस मामले में कंपनी का राजस्व 100-500 करोड़ रुपये के बीच पाया और 50 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। फैसले में कहा गया, जुर्माना लगाने के लिए एनजीटी द्वारा अपनाई गई पद्धति किसी भी विधिक सिद्धांत के तहत स्वीकार्य नहीं मानी जा सकती। हम इस टिप्पणी से पूर्णतः सहमत हैं और यह जोड़ते हैं कि कानून का शासन राज्य या उसकी एजेंसियों को, पर्यावरण से जुड़े मामलों में भी, ‘एक दमड़ी तक’ वसूलने की अनुमति नहीं देता।
उल्लंघन के खिलाफ कार्यवाही NGT Decisions
किसी भी वैधानिक या अन्य शर्तों के उल्लंघन के खिलाफ कार्यवाही करने के अधिकार क्षेत्र वाले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकार को सुरक्षित रखते हुए, शीर्ष अदालत ने कहा कि एनजीटी का निर्देश रद्द किए जाने योग्य है। पीठ ने एनजीटी के एक अन्य निर्देश को भी रद्द कर दिया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय को प्रदूषणकारी कंपनी के खिलाफ धन शोधन की जांच शुरू करने के लिए कहा गया था, और कहा कि हरित निकाय को एनजीटी अधिनियम 2010 की धारा 15 के तहत शक्तियों के दायरे में कार्य करना चाहिए।
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