Stay on Islamabad High Court Order: इस्लामाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक, जस्टिस जहांगीरी कर सकेंगे न्यायिक कार्य

NH-152D Land Acquisition Case

Stay on Islamabad High Court Order: पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय से आज इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तारिक महमूद जहांगीरी (Tariq Mahmood Jahangiri) को तात्कालिक राहत मिल गई। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी। उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति जहांगीरी को न्यायिक कार्य से विलग कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल कार्यालय सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।

न्यायमूर्ति जहांगीरी की याचिका Stay on Islamabad High Court Order

द न्यूज अखबार की रिपोर्ट के अनुसार उच्चतम न्यायलय के न्यायमूर्ति अमीनुद्दीन खान की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जहांगीरी की याचिका पर यह आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय मंगलवार को भी इस मामले की सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति जहांगीरी ने उच्च न्यायालय के 16 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी। संवैधानिक पीठ में न्यायमूर्ति जमाल खान मंदोखैल, न्यायमूर्ति मोहम्मद अली मज़हर, न्यायमूर्ति सैयद हसन अजहर रिज़वी और न्यायमूर्ति शाहिद बिलाल हसन भी शामिल है।

उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया Stay on Islamabad High Court Order

संवैधानिक पीठ का यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सरदार मोहम्मद सरफराज डोगर की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति मोहम्मद आजम खान की सदस्यता वाली इस्लामाबाद उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ के न्यायमूर्ति जहांगीरी को उनके खिलाफ लंबित एक याचिका पर सर्वोच्च न्यायिक परिषद के फैसले तक न्यायिक कर्तव्यों के निर्वहन से रोक दिए जाने के बाद सामने आया है। यह याचिका वकील मियां दाऊद ने दायर की थी। इस फैसले के बाद न्यायमूर्ति जहांगीरी सहित इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अन्य चार न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहसिन अख्तर कियानी, न्यायमूर्ति बाबर सत्तार, न्यायमूर्ति समन रिफत और न्यायमूर्ति एजाज इशाक खान हैं।

कानून की डिग्री से जुड़ा हुआ Stay on Islamabad High Court Order

दरअसल, यह मामला इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति तारिक महमूद जहांगीरी कानून की डिग्री से जुड़ा हुआ है। कराची विश्वविद्यालय ने 32 वर्ष बाद उनकी कानून की डिग्री रद्द कर दी है। न्यायाधीश जहांगीरी ने सिंध उच्च न्यायालय (एसएचसी) में कराची विश्वविद्यालय के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि न्यायिक स्वायत्तता की पक्षधरता के लिए उन्हें कार्यपालिका के शक्तिशाली सदस्यों से प्रतिशोध का सामना करना पड़ रहा है।

न्यायमूर्ति जहांगीरी की कानून की डिग्री रद्द Stay on Islamabad High Court Order

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार कराची विश्वविद्यालय के सिंडिकेट ने विश्वविद्यालय की अनुचित साधन (यूएफएम) समिति की सिफारिश पर 31 अगस्त, 2024 को न्यायमूर्ति जहांगीरी की कानून की डिग्री रद्द कर दी। हालांकि, पांच सितंबर, 2024 को उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय के फैसले को स्थगित कर दिया। पिछले हफ्ते 16 सितंबर को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सरदार मोहम्मद सरफराज डोगर और न्यायमूर्ति मुहम्मद आजम खान की खंडपीठ ने न्यायमूर्ति जहांगीरी को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोक दिया। खंडपीठ न्यायाधीश पर संदिग्ध एलएलबी डिग्री रखने का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती Stay on Islamabad High Court Order

न्यायाधीश जहांगीरी ने खंडपीठ के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने आज सुनवाई की। इसके अलावा न्यायमूर्ति जहांगीरी ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में भी एक याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि जिस सामान्य संदर्भ में उनकी एलएलबी की डिग्री को अवैध और दुर्भावनापूर्ण तरीके से रद्द किया गया है, वह उनकी अडिग न्यायिक स्वतंत्रता है। जहांगीरी का तर्क है कि उनकी डिग्री संघीय सरकार और उसकी एजेंसियों के हस्तक्षेप की वजह से दुर्भावनापूर्ण तरीके से रद्द की गई।

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