जींद: Safion Factory Fire सफीदों स्थित गीता कालोनी में स्मॉग कैंडल तथा रंग गुलाल की अवैध फैक्टरी में लगी आग में झुलसी दो और महिलाओं ने रविवार को पीजीआई रोहतक में उपचार के दौरान मौत हो गई। इस घटना में मरने वाली महिला मजदूरों की संख्या छह हो गई है। जबकि 12 मजदूर अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। शहर थाना सफीदों पुलिस ने मृतकों के शवों का पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सौंप दिया है। वहीं पुलिस ने फैक्टरी मालिक समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए फैक्टरी मालिक को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस फैक्टरी मालिक से पूछताछ कर रही है।
रविवार को पीजीआई रोहतक में दो और महिलाओं ने तोड़ा दम Safion Factory Fire
गौरतलब है कि सफीदों की गीता कालोनी में रंग, गुलाल बनाने की आड़ में विस्फोट सामग्री से कैमिकल मिला कर स्मॉग कैंडल बनाई जाती थी। शनिवार को फैक्टरी में लगी आग से सफीदों निवासी महिला मजदूर पूजा, पिंकी, गुड्डी, ऊषा की झुलसने से मौत हो गई थी। जबकि 13 मजदूरों की गंभीर हालातों को देखते हुए उन्हें पीजीआई में ले जाया गया था। रविवार को दिग्गी मोहल्ला सफीदों निवासी 35 वर्षीय सरिता व 60 वर्षीय धनपति ने उपचार के दौरान पीजीआई रोहतक में दम तोड़ दिया। शहर थाना सफीदों पुलिस ने दोनों मृतक महिलाओं के शवों का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिए हैं। वहीं पुलिस ने फैक्टरी मालिक राकेश उर्फ राजू को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि चार अन्य की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
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पुलिस ने फैक्टरी मालिक को किया गिरफ्तार, पूछताछ जारी Safion Factory Fire
शहर थाना सफीदों प्रभारी पूर्णदास ने बताया कि गंभीर रूप से झूलसी दो और महिलाओं ने रविवार को पीजीआई रोहतक में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अबतक इस घटना में छह महिलाओं की मौत हो चुकी है। पुलिस ने फैक्टरी मालिक को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है।
छह हजार रुपये महीना प्रति मजदूर को दिया जाता था मेहनताना Safion Factory Fire
सफीदों की गीता कालोनी में रंग की फैक्टरी पिछले डेढ़ साल से चलाई जा रही थी। इसमें 21 लोग काम कर रहे थे। इनमें पांच पुरुष व 15 महिलाएं शामिल थी। यहां काम करने वाले मजदूरों को छह हजार रुपये प्रति महीना मेहनताना दिया जाता था। सुरक्षा मानकों की फैक्टरी में अनदेखी थी। मजदूर सुबह तय समय पर जब फैक्टरी में प्रवेश करते थे तो उसके बाद फैक्टरी के गेट पर ताला लगा दिया जाता था। इसके बाद जब वह दोपहर को भोजन के लिए बाहर आते या फिर शाम को छुट्टी करके आते, उसी समय ताला खोला जाता था। पूरा दिन फैक्टरी को मुख्य गेट के बाहर ताला लगा रहता था। घटना के समय भी फैक्टरी के मुख्य गेट पर ताला लगा हुआ था। जब लोगों ने चीख पुकार सुनी और धुआं उठता देखा तो लोग फैक्टरी की तरफ दौड़े। जब उन्होंने गेट पर ताला लगा देखा तो दीवार तोड़ कर वहां से कुछ लोगों को निकला। जब तक फैक्टरी में फंसे लोगों को बाहर निकाला जाता। तब तक मंजर बदल चुका था।
फैक्टरी में बनाई जाती थी स्मॉग कैंडल Safion Factory Fire
फैक्टरी में जो स्मॉग कैंडल बनाई जाती थी, उनमें पोटेशियम नाइट्रेट का प्रयोग होता है। आग लगने के बाद इनसे नाइट्रेट आक्साइड गैस निकलती है, जो जहरीली होता है। यह गैस व्यक्ति का दम घोट देती है। इसके अलावा स्मॉग कैंडल बहुत तेज धुआं छोड़ती है, जो दम घोट देता है। आशंका जताई जा रही है कि इसी धुएं से महिलाओं का दम घुट गया और वह गिर गई होंगी। जिस कारण वह आग की चपेट में आ गई। फिलहाल फोरेंसिक टीमें मामले की जांच कर रही हैं। वहीं स्माग कैंडल को बनाने में पोटेशियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जलने से नाइट्रेट आक्साइड गैस बनती है, जो बहुत जहरीली होती है। इसी गैस के कारण अम्लीय वर्षा भी होती है। जब फैक्टरी में आग लगी तो यहां पड़े पोटेशियम नाइट्रेट में भी आग लग गई। आग से झुलसे पवन ने बताया कि उसने पानी की बाल्टी आग पर फेंकी तो आग और भड़क गई। इससे साफ है कि फैक्टरी में पोटेशिायम भी शुद्ध मात्रा में था, जिसका यहां प्रयोग किया जा रहा था।
फैक्टरी पूरी तरह से अवैध Safion Factory Fire
जिला फायर सेफ्टी अधिकारी रामेश्वर ने बताया कि फैक्टरी पूरी तरह से अवैध थी। कोई भी फायर एनओसी नहीं ली गई थी। यदि गेट पर ताला नही लगा होता तो जान की हानि नहीं होती।
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