नई दिल्ली Delhi University दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित हायर एजुकेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (हेकी) बिल का विरोध किया है। शीतकालीन सत्र में यह बिल आने की संभावना है।
Delhi University डीयू के पूर्व डूटा अध्यक्ष आदित्य नारायण मिश्र ने एक प्रेसवार्ता कर सोमवार को कहा कि हम मांग करते हैं कि इस बिल में क्या है उसे पटल पर रखने से पहले सार्वजनिक किया जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार किया गया यह प्रारूप शिक्षा को निजीकरण की दिशा में ढकेलने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि हेकी न केवल यूजीसी एक्ट 1956 को समाप्त कर देगा, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की उस मंशा को लागू करेगा जिसमें विनियमन और फंडिंग को अलग कर उच्च शिक्षा को प्रतिस्पर्धी बाजार के हवाले करने की तैयारी है। इसमें बोर्ड ऑफ गवर्नर बनाने का प्रस्ताव है। जो विश्वविद्यालय से जुड़े सभी निर्णय लेगा। एनईपी 2020 के अनुसार यह विश्वविद्यालय की पुरानी सभी निर्णय लेने वाली इकाइयों से ऊपर होगा। यह एक चिंताजनक बात है।
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Delhi University उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बिल अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है और छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा विशेषज्ञों जैसे प्रमुख हितधारकों से कोई व्यापक परामर्श भी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड ऑफ गवर्नर एक केंद्रीकृत और गैर-लोकतांत्रिक संरचना है जो विश्वविद्यालयों की पारंपरिक निर्वाचित निकायों एक्जीक्यूटिव काउंसिल, एकेडमिक काउंसिल और गवर्निंग बॉडी को अप्रभावी बना देगी। सरकार से ड्राफ्ट सार्वजनिक करने की मांग दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने कहा है कि शिक्षा मंत्रालय तुरंत प्रस्तावित हेकी बिल का पूरा मसौदा सार्वजनिक करे और उसे संसद में प्रस्तुत करने से पहले हितधारकों, जिसमें डूटा भी शामिल है के साथ सार्थक संवाद शुरू करे।
Delhi University डूटा का कहना है कि किसी भी नए विधेयक में कुछ मूलभूत सुरक्षा प्रावधानों को हर हाल में बनाए रखना होगा। इनमें विश्वविद्यालयों की मौजूदा प्रशासनिक संरचनाओं में कोई बदलाव न करना, सार्वजनिक वित्तपोषण की निरंतरता सुनिश्चित करना, तथा भर्ती प्रक्रियाओं, पदोन्नति मार्गों और सेवा शर्तों की पूर्ण सुरक्षा शामिल है। इसके अलावा संगठन ने कहा कि वेतन, पेंशन, चिकित्सा सुविधाएं, एलटीसी, एचआरए और अन्य सभी भत्ते केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान ही बने रहने चाहिए। डूटा के अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी ने सरकार से आग्रह किया है कि किसी भी निर्णय से पहले व्यापक विचार-विमर्श सुनिश्चित किया जाए ताकि उच्च शिक्षा के भविष्य को प्रभावित करने वाले निर्णय जल्दबाजी या अस्पष्टता में न लिए जाएं।
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